पुरुष बांझपन क्या है? | Male Infertility in Hindi
भारत के प्रमुख फर्टिलिटी सेंटर्स में से एक, SCI हॉस्पिटल, पुरुष बांझपन के इलाज में सालों से हजारों जोड़ों की मदद कर रहा है। यहाँ के अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक तकनीकें यह सुनिश्चित करती हैं कि आपको सबसे अच्छा इलाज मिले। इस लेख में, हम पुरुष बांझपन के बारे में सब कुछ सरल भाषा में जानेंगे। हम इसके कारण, लक्षण, जांच और इलाज के विकल्पों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
पुरुष बांझपन (Male Infertility)
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई स्वास्थ्य समस्याएँ आम हो गई हैं। पुरुष बांझपन भी उन्हीं में से एक है। पहले इस विषय पर लोग खुलकर बात करने से झिझकते थे। लेकिन अब समय बदल रहा है। अच्छी खबर यह है कि मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। आज पुरुष बांझपन के लगभग हर कारण का सफल इलाज संभव है।
पुरुष बांझपन क्या है? (What is Male Infertility?)
पुरुष बांझपन को समझने से पहले, यह जानना ज़रूरी है कि 'बांझपन' या 'इनफर्टिलिटी' किसे कहते हैं।
बांझपन की सरल परिभाषा (Simple Definition of Infertility)
मेडिकल भाषा में, अगर कोई शादीशुदा जोड़ा एक साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल किए नियमित रूप से यौन संबंध बनाता है, और फिर भी महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है, तो इस स्थिति को बांझपन (Infertility) कहा जाता है।
पुरुष बांझपन का मतलब क्या है? (What does Male Infertility mean?)
पुरुष बांझपन एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें पुरुष के शरीर में कुछ समस्याओं के कारण वह अपनी महिला साथी को गर्भधारण कराने में असमर्थ होता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पुरुष में यौन संबंध बनाने की क्षमता में कोई कमी है।
कई बार पुरुष यौन रूप से पूरी तरह स्वस्थ होता है, लेकिन उसके शरीर में शुक्राणु (Sperm) या तो पर्याप्त मात्रा में नहीं बन रहे होते, या उनकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती, या फिर वे महिला के अंडे (Egg) तक पहुँचने में सक्षम नहीं होते। इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि गर्भधारण एक पौधे को उगाने जैसा है। इसके लिए एक स्वस्थ बीज (शुक्राणु), अच्छी मिट्टी (महिला का गर्भाशय) और बीज को मिट्टी तक पहुँचाने का सही तरीका चाहिए।
पुरुष बांझपन के लक्षण (Symptoms of Male Infertility)
कई मामलों में, पुरुष बांझपन का कोई स्पष्ट बाहरी लक्षण नहीं होता है। एक पुरुष पूरी तरह से स्वस्थ दिख सकता है, उसे यौन जीवन में कोई समस्या नहीं हो सकती, और फिर भी उसे बांझपन की समस्या हो सकती है। हालाँकि, कुछ संकेत और लक्षण हैं जो इस समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
मुख्य लक्षण क्या हैं? (What are the main symptoms?)
पुरुष बांझपन के लक्षणों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है।
गर्भधारण में समस्या (Problem in conceiving)
पुरुष बांझपन का सबसे बड़ा और सबसे मुख्य लक्षण है - एक साल तक कोशिश करने के बाद भी महिला साथी का गर्भधारण न कर पाना। जैसा कि हमने पहले बताया, अगर कोई जोड़ा एक साल से बिना किसी सुरक्षा के नियमित संबंध बना रहा है और फिर भी प्रेग्नेंसी नहीं हो रही है, तो यह बांझपन का संकेत है। ऐसे में पुरुष और महिला दोनों को अपनी जांच करवानी चाहिए। अक्सर पुरुष यह मानकर चलते हैं कि समस्या महिला में ही होगी, और अपनी जांच कराने में देरी कर देते हैं, जिससे कीमती समय नष्ट हो जाता है।
शारीरिक और यौन स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण (Symptoms related to physical and sexual health)
गर्भधारण में समस्या के अलावा, कुछ अन्य शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं जो अंदरूनी समस्या का संकेत दे सकते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देना ज़रूरी है:
- यौन इच्छा में कमी: अगर आपकी सेक्स ड्राइव या कामेच्छा (Libido) में अचानक या धीरे-धीरे कमी आ रही है, तो यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है, जो फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
- इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष): यौन संबंध के लिए इरेक्शन पाने या उसे बनाए रखने में कठिनाई होना भी एक अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का लक्षण हो सकता है।
- अंडकोष (Testicles) में समस्या: अंडकोष में दर्द, सूजन, गांठ या उनका आकार सामान्य से बहुत छोटा होना किसी समस्या का संकेत हो सकता है। वैरिकोसील जैसी स्थिति में अंडकोष की नसें सूज जाती हैं, जो बांझपन का एक मुख्य कारण है।
- हार्मोनल असंतुलन के लक्षण: हार्मोनल असंतुलन होने पर शरीर में कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे चेहरे या शरीर पर बालों का कम होना, स्तनों का असामान्य रूप से बढ़ना (गाइनेकोमेस्टिया), और आवाज में बदलाव या उसका बहुत पतला हो जाना।
- स्खलन (Ejaculation) में समस्या: स्खलन के दौरान वीर्य (Semen) का बहुत कम मात्रा में निकलना या बिल्कुल न निकलना भी एक समस्या हो सकती है।
- बार-बार श्वसन संक्रमण: कुछ दुर्लभ जेनेटिक मामलों में, जिन पुरुषों को बार-बार फेफड़ों का इन्फेक्शन होता है, उन्हें बांझपन की समस्या भी हो सकती है।
डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? (When to see a doctor?)
सही समय पर डॉक्टर से मिलना इलाज की सफलता की कुंजी है। आपको निम्नलिखित स्थितियों में बिना देर किए एक अच्छे फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए:
खतरे के संकेत (Red Flag signs)
अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी शारीरिक लक्षण (जैसे अंडकोष में दर्द, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, यौन इच्छा में कमी) महसूस हो रहे हैं, तो आपको एक साल का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। ये लक्षण किसी गंभीर मेडिकल स्थिति का संकेत हो सकते हैं, जिसका तुरंत इलाज ज़रूरी है। इन लक्षणों के साथ, आपको तुरंत SCI हॉस्पिटल जैसे विशेषज्ञ केंद्र में संपर्क करना चाहिए।
एक साल के प्रयास के बाद (After one year of trying)
यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से कम है और आप और आपकी साथी एक साल से गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे हैं और सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो यह सही समय है कि आप दोनों डॉक्टर से मिलें। अगर आपकी महिला साथी की उम्र 35 वर्ष से अधिक है, तो आपको 6 महीने के प्रयास के बाद ही डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए, क्योंकि उम्र के साथ महिला की फर्टिलिटी तेजी से कम होती है।
पुरुष बांझपन के मुख्य कारण (Main Causes of Male Infertility)
पुरुष बांझपन के पीछे कोई एक कारण नहीं होता। यह कई मेडिकल, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों का मिला-जुला परिणाम हो सकता है। पुरुष बांझपन के कारणों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है:
मेडिकल कारण (Medical Causes)
ये वे कारण हैं जो शरीर की अंदरूनी बनावट या कामकाज में किसी गड़बड़ी की वजह से होते हैं।
वैरिकोसील (Varicocele)
यह पुरुष बांझपन का सबसे आम और इलाज योग्य कारण है। वैरिकोसील में अंडकोष की थैली (Scrotum) में मौजूद नसें सूज जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे पैरों में वैरिकोज वेन्स होती हैं। इन सूजी हुई नसों के कारण अंडकोष का तापमान बढ़ जाता है। शुक्राणु बनने के लिए शरीर के तापमान से थोड़ा कम तापमान चाहिए होता है।
इन्फेक्शन (Infection)
कई तरह के इन्फेक्शन पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकते हैं। यौन संचारित रोग (STDs) जैसे क्लैमाइडिया और गोनोरिया, प्रोस्टेट ग्रंथि का इन्फेक्शन (Prostatitis), या अंडकोष का इन्फेक्शन (Orchitis) शुक्राणु उत्पादन में बाधा डाल सकते हैं। ये इन्फेक्शन शुक्राणु को ले जाने वाली नलियों में ब्लॉकेज भी पैदा कर सकते हैं। समय पर एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज करके इन इन्फेक्शन को ठीक किया जा सकता है।
हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)
पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) और अन्य हार्मोन शुक्राणु बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। दिमाग में मौजूद पिट्यूटरी और हाइपोथैलेमस ग्रंथियां इन हार्मोन्स को नियंत्रित करती हैं। अगर इन ग्रंथियों में कोई समस्या हो, या शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाए, तो शुक्राणु का उत्पादन कम या बंद हो सकता है।
शुक्राणु से जुड़ी समस्याएँ (Sperm-related problems)
यह पुरुष बांझपन का एक बहुत बड़ा कारण है। इसमें कई तरह की समस्याएँ हो सकती हैं:
- ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia): शुक्राणुओं की संख्या का बहुत कम होना।
- एस्थेनोस्पर्मिया (Asthenospermia): शुक्राणुओं की गतिशीलता (Motility) यानी तैरने की क्षमता का कम होना। अंडे तक पहुँचने के लिए शुक्राणु का गतिशील होना ज़रूरी है।
- टेराटोस्पर्मिया (Teratospermia): शुक्राणुओं के आकार और बनावट में खराबी होना। असामान्य आकार वाले शुक्राणु अंडे को निषेचित (Fertilize) नहीं कर पाते।
- एजूस्पर्मिया (Azoospermia): वीर्य में शुक्राणुओं का बिल्कुल भी न होना। यह या तो उत्पादन की समस्या के कारण होता है या फिर ब्लॉकेज के कारण।
आनुवंशिक (जेनेटिक) कारण (Genetic Causes)
कुछ जेनेटिक बीमारियाँ भी पुरुष बांझपन का कारण बन सकती हैं। इनमें क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's syndrome), सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis), और Y-क्रोमोसोम माइक्रोडीलीशन शामिल हैं।
पुरानी बीमारियाँ और दवाएँ (Chronic diseases and medications)
कुछ पुरानी बीमारियाँ जैसे डायबिटीज, किडनी की बीमारी, या लिवर की गंभीर बीमारी भी फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, कुछ दवाएँ जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएँ (कीमोथेरेपी) भी शुक्राणु उत्पादन पर बुरा असर डाल सकती हैं।
जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़े कारण (Lifestyle and Environmental Causes)
आजकल के समय में ये कारण बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। हमारी रोजमर्रा की आदतें और हमारा आस-पास का माहौल भी हमारी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है।
तनाव और मानसिक स्वास्थ्य (Stress and Mental Health)
लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) शरीर में हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकता है और शुक्राणु उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। काम का दबाव, पारिवारिक चिंताएँ और बांझपन का तनाव खुद एक दुष्चक्र बना देता है।
मोटापा और खानपान (Obesity and Diet)
शरीर का वजन ज्यादा होना (मोटापा) हार्मोनल बदलाव लाता है, जिससे फर्टिलिटी कम हो जाती है। इसके अलावा, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और पोषक तत्वों की कमी वाला आहार शुक्राणुओं की क्वालिटी को खराब करता है। विटामिन सी, जिंक, सेलेनियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार शुक्राणुओं के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।
धूम्रपान, शराब और नशा (Smoking, Alcohol, and Drugs)
- धूम्रपान: सिगरेट में मौजूद हानिकारक रसायन शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और उनके DNA को नुकसान पहुँचाते हैं।
- शराब: अत्यधिक शराब का सेवन टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करता है और शुक्राणु उत्पादन को घटाता है।
- नशा: मारिजुआना, कोकीन और स्टेरॉयड जैसे नशीले पदार्थ प्रजनन क्षमता पर बहुत बुरा असर डालते हैं।
गर्मी और रेडिएशन का प्रभाव (Effect of Heat and Radiation)
अंडकोष का तापमान शरीर के बाकी हिस्सों से थोड़ा कम रहना चाहिए। जो लोग बहुत गर्म वातावरण में काम करते हैं (जैसे भट्टियों के पास), बहुत देर तक लैपटॉप गोद में रखकर काम करते हैं, या बहुत टाइट अंडरवियर पहनते हैं, उनके अंडकोष का तापमान बढ़ सकता है, जिससे शुक्राणु उत्पादन प्रभावित होता है।
पुरुष बांझपन की जांच के तरीके (Diagnostic Methods for Male Infertility)
जब आप गर्भधारण में समस्या को लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वे कुछ जांच और टेस्ट की सलाह देते हैं ताकि समस्या की सही वजह का पता चल सके।
डॉक्टर से पहली मुलाकात में क्या होता है?
आपकी पहली विज़िट बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसमें डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करते हैं।
- मेडिकल हिस्ट्री: डॉक्टर आपसे आपके स्वास्थ्य, बचपन में हुई बीमारियों, किसी पुरानी चोट या सर्जरी (खासकर पेट या जननांगों के क्षेत्र में), आपकी यौन आदतों, और आपकी जीवनशैली (खान-पान, व्यायाम, नशा आदि) के बारे में सवाल पूछेंगे।
- शारीरिक जाँच: इसके बाद डॉक्टर आपके जननांगों की शारीरिक जांच करेंगे। वे अंडकोष के आकार, बनावट, और किसी भी गांठ या सूजन (जैसे वैरिकोसील) की जांच करेंगे। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ ही मिनट लगते हैं।
मुख्य जांच और टेस्ट (Main Investigations and Tests)
शारीरिक जांच और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर, डॉक्टर कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
सीमेन एनालिसिस (वीर्य की जांच) (Semen Analysis)
पुरुष बांझपन की जांच के लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट वीर्य जांच है, जिसमें आपके वीर्य का सैंपल लेकर लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे देखा जाता है। इससे शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता, आकार, वीर्य की मात्रा तथा pH के बारे में जानकारी मिलती है।
ब्लड टेस्ट (हार्मोन की जांच) (Blood Test - Hormone analysis)
अगर सीमेन एनालिसिस की रिपोर्ट में कोई बड़ी गड़बड़ी आती है, तो डॉक्टर हार्मोन के स्तर की जांच के लिए ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इस टेस्ट से मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन, FSH (फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन), और LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) के स्तर को मापा जाता है। हार्मोन का असंतुलन शुक्राणु उत्पादन में समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है।
स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड (Scrotal Ultrasound)
यह एक दर्द रहित स्कैन है, जिसमें ध्वनि तरंगों का उपयोग करके अंडकोष और आसपास की संरचनाओं की तस्वीर बनाई जाती है। इस टेस्ट से डॉक्टर वैरिकोसील (नसों की सूजन) या शुक्राणु ले जाने वाली नलियों में किसी भी तरह की रुकावट (ब्लॉकेज) का पता लगा सकते हैं।
जेनेटिक टेस्टिंग (Genetic Testing)
अगर डॉक्टर को किसी आनुवंशिक कारण का संदेह होता है, तो वे जेनेटिक टेस्टिंग की सलाह दे सकते हैं। यह एक ब्लड टेस्ट होता है जिससे क्रोमोसोम में किसी भी असामान्यता का पता लगाया जाता है, जैसे कि क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम। यह टेस्ट उन मामलों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहाँ शुक्राणुओं की संख्या बहुत ही कम होती है या बिल्कुल नहीं होती।
टेस्टिकुलर बायोप्सी (Testicular Biopsy)
यह एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया है जो कुछ विशेष मामलों में ही की जाती है, खासकर जब वीर्य में शुक्राणु बिल्कुल नहीं होते (एजूस्पर्मिया)। इसमें अंडकोष से ऊतक का एक बहुत छोटा सा सैंपल लिया जाता है और उसे जांचा जाता है कि क्या अंडकोष में शुक्राणु बन रहे हैं या नहीं। अगर शुक्राणु बन रहे हैं, तो उन्हें निकालकर आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
पुरुष बांझपन का इलाज (Treatment for Male Infertility)
जांच के बाद जब बांझपन का सही कारण पता चल जाता है, तो डॉक्टर आपके लिए सबसे अच्छे इलाज की योजना बनाते हैं। यह जानना राहत की बात है कि आज पुरुष बांझपन के 85% से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। इलाज का तरीका बांझपन के कारण, उसकी गंभीरता, आपकी उम्र और आपके साथी के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। SCI हॉस्पिटल में हम हर जोड़े के लिए एक व्यक्तिगत (Customized) ट्रीटमेंट प्लान बनाते हैं।
इलाज के विभिन्न विकल्प (Various Treatment Options)
इलाज के विकल्पों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है।
दवाएँ और सप्लीमेंट्स (Medicines and Supplements)
- इन्फेक्शन का इलाज: अगर बांझपन का कारण कोई बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स दे सकते हैं।
- हार्मोनल समस्याओं का इलाज: अगर शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ा हुआ है, तो हार्मोन थेरेपी या दवाओं के जरिए उसे ठीक किया जा सकता है। इससे शुक्राणु का उत्पादन फिर से सामान्य हो सकता है।
- इरेक्टाइल डिसफंक्शन का इलाज: इरेक्शन या स्खलन से जुड़ी समस्याओं के लिए भी प्रभावी दवाएँ उपलब्ध हैं।
- सप्लीमेंट्स: कई बार डॉक्टर शुक्राणुओं की क्वालिटी और संख्या को बेहतर बनाने के लिए कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स (जैसे विटामिन ई, विटामिन सी, सेलेनियम, जिंक, को-एंजाइम Q10) के सप्लीमेंट्स भी दे सकते हैं।
सर्जरी (Surgery)
कुछ मामलों में, समस्या को ठीक करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
- वैरिकोसील की सर्जरी: अगर वैरिकोसील (नसों की सूजन) बांझपन का कारण है, तो एक छोटी सर्जरी (वैरिकोसेलेक्टोमी) के जरिए उन सूजी हुई नसों को ठीक किया जा सकता है। इससे अंडकोष का तापमान सामान्य हो जाता है और लगभग 60-70% पुरुषों में शुक्राणुओं की क्वालिटी में सुधार देखा जाता है। SCI हॉस्पिटल में यह सर्जरी माइक्रोस्कोपिक तकनीक से की जाती है, जिससे सफलता दर बहुत अधिक होती है।
- ब्लॉकेज को हटाना: अगर शुक्राणु ले जाने वाली नलियों (Vas Deferens) में कोई रुकावट है, तो सर्जरी के जरिए उस ब्लॉकेज को हटाया जा सकता है।
- स्पर्म रिट्रीवल तकनीक (TESA/PESA): अगर वीर्य में शुक्राणु नहीं आ रहे हैं (Azoospermia), लेकिन अंडकोष में बन रहे हैं, तो TESA (टेस्टीकुलर स्पर्म एस्पिरेशन) या PESA (पर्क्यूटेनियस एपिडिडिमल स्पर्म एस्पिरेशन) जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) (Assisted Reproductive Technology)
जब दवाओं या सर्जरी से बात नहीं बनती, या समस्या अधिक गंभीर होती है, तो डॉक्टर ART तकनीकों की मदद लेते हैं। ये बहुत ही उन्नत तकनीकें हैं जिनसे लाखों जोड़ों को माता-पिता बनने का सुख मिला है।
आईयूआई (IUI - Intrauterine Insemination)
यह एक सरल प्रक्रिया है। इसमें पुरुष के वीर्य का सैंपल लेकर उसे लैब में प्रोसेस किया जाता है। इसमें से सबसे अच्छे और सबसे गतिशील शुक्राणुओं को अलग कर लिया जाता है। फिर, महिला के ओव्यूलेशन (जब अंडा अंडाशय से निकलता है) के समय, इन शुक्राणुओं को एक पतले कैथेटर के माध्यम से सीधे महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है। यह प्रक्रिया उन मामलों में मददगार होती है जहाँ शुक्राणुओं की संख्या थोड़ी कम हो या उनकी गतिशीलता में हल्की कमी हो।
आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization)
आईवीएफ को आम भाषा में 'टेस्ट ट्यूब बेबी' भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में, महिला को इंजेक्शन देकर एक से अधिक अंडे बनाने के लिए उत्तेजित किया जाता है। फिर इन अंडों को शरीर से बाहर निकाल लिया जाता है। लैब में, इन अंडों को पुरुष के शुक्राणुओं के साथ एक डिश में रखा जाता है ताकि निषेचन (Fertilization) हो सके। जब भ्रूण (Embryo) बन जाता है, तो उसे 2 से 5 दिनों के बाद वापस महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
आईसीएसआई (ICSI - Intracytoplasmic Sperm Injection)
यह आईवीएफ का ही एक एडवांस्ड रूप है और पुरुष बांझपन के लिए एक क्रांतिकारी तकनीक है। यह उन मामलों में इस्तेमाल होती है जहाँ शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम होती है, उनकी गतिशीलता खराब होती है, या उनका आकार ठीक नहीं होता। ICSI में, एक बहुत शक्तिशाली माइक्रोस्कोप के नीचे, एक सबसे स्वस्थ शुक्राणु को चुनकर उसे एक बहुत पतली सुई में लिया जाता है और सीधे अंडे के अंदर इंजेक्ट कर दिया जाता है। इससे निषेचन की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
डोनर स्पर्म (Donor Sperm)
कुछ दुर्लभ मामलों में, जब पुरुष के शरीर में बिल्कुल भी शुक्राणु नहीं बन रहे होते और कोई भी इलाज काम नहीं करता, तो डोनर स्पर्म का विकल्प भी मौजूद होता है।
इलाज का खर्च और बजट प्लानिंग (Cost of treatment and budget planning)
पुरुष बांझपन के इलाज का खर्च उसके कारण और इलाज के तरीके पर निर्भर करता है। दवाओं और सप्लीमेंट्स का खर्च कम होता है, जबकि सर्जरी और ART प्रक्रियाओं (जैसे IVF, ICSI) का खर्च अधिक होता है।
हम समझते हैं कि यह एक बड़ा वित्तीय निर्णय हो सकता है, इसलिए हम आपको बजट की योजना बनाने में मदद करते हैं। कई ट्रीटमेंट पैकेज और EMI के विकल्प भी उपलब्ध होते हैं, जिससे आप पर एक साथ वित्तीय बोझ नहीं पड़ता। याद रखें, एक स्वस्थ बच्चे की खुशी के आगे यह निवेश बहुत मूल्यवान है।
जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपाय (Lifestyle Changes and Home Remedies)
मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ-साथ आपकी जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव भी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बदलाव न केवल आपकी फर्टिलिटी को बढ़ाते हैं, बल्कि आपके समग्र स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं।
खानपान में सुधार (Dietary Improvements)
आप जो खाते हैं, उसका सीधा असर आपके शुक्राणुओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। एक संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और आकार में सुधार कर सकता है।
क्या खाएं? (What to eat?)
अपने आहार में इन चीजों को शामिल करने की कोशिश करें, ये शुक्राणुओं के लिए सुपरफूड्स माने जाते हैं:
- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और सब्जियाँ: गहरे रंग की सब्जियाँ और फल जैसे पालक, टमाटर, अनार, संतरे, जामुन आदि खाएं। ये शरीर को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं, जो शुक्राणुओं को डैमेज कर सकते हैं।
- जिंक (Zinc) के स्रोत: जिंक शुक्राणुओं के निर्माण और टेस्टोस्टेरोन के स्तर के लिए बहुत ज़रूरी है। कद्दू के बीज, तिल, दालें, और चने इसके अच्छे स्रोत हैं।
- सेलेनियम (Selenium): यह शुक्राणुओं की गतिशीलता के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए आप अंडे, चिकन और मशरूम खा सकते हैं।
- विटामिन सी: खट्टे फल, शिमला मिर्च, और ब्रोकली में भरपूर विटामिन सी होता है जो शुक्राणुओं को एक साथ चिपकने से रोकता है।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड: अखरोट, अलसी के बीज और मछली (यदि आप खाते हैं) में यह पाया जाता है। यह शुक्राणुओं की झिल्ली को स्वस्थ रखता है।
क्या न खाएं? (What to avoid?)
कुछ चीजें हैं जिनसे आपको परहेज करना चाहिए या उनका सेवन कम करना चाहिए:
- प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड: पिज्जा, बर्गर, चिप्स और पैकेट वाले स्नैक्स में ट्रांस फैट और हानिकारक रसायन हो सकते हैं।
- सोया प्रोडक्ट्स: सोया में फाइटोएस्ट्रोजेन होता है, जो अधिक मात्रा में लेने पर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है।
- अत्यधिक चीनी और मीठे पेय: ये वजन बढ़ाते हैं और हार्मोनल समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
- शराब और धूम्रपान: जैसा कि पहले बताया गया है, ये आपकी फर्टिलिटी के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इन्हें पूरी तरह से छोड़ देना सबसे अच्छा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
पुरुष बांझपन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। यहाँ हम कुछ सबसे आम सवालों के जवाब दे रहे हैं।
प्रश्न 1: पुरुष बांझपन कितना आम है?
उत्तर: पुरुष बांझपन बहुत आम है। यह अनुमान है कि बांझपन के कुल मामलों में से लगभग आधे मामलों में पुरुष कारक किसी न किसी रूप में जिम्मेदार होता है। यह कोई शर्मिंदगी की बात नहीं है, बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है जिसका इलाज संभव है।
प्रश्न 2: क्या पुरुष बांझपन को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है?
उत्तर: यह बांझपन के कारण पर निर्भर करता है। अगर कारण वैरिकोसील या कोई इन्फेक्शन है, तो सर्जरी या दवाओं से उसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। SCI हॉस्पिटल में हम आपकी स्थिति के अनुसार सबसे अच्छा समाधान प्रदान करते हैं।
प्रश्न 3: पुरुष बांझपन के इलाज में कितना समय लगता है?
उत्तर: इलाज की अवधि भी कारण और चुने गए ट्रीटमेंट पर निर्भर करती है। दवाओं का असर दिखने में 3-6 महीने लग सकते हैं (क्योंकि नए शुक्राणु बनने में लगभग 3 महीने लगते हैं)। आईवीएफ-आईसीएसआई की एक साइकिल में आमतौर पर 4-6 हफ्ते लगते हैं।
प्रश्न 4: वीर्य जांच (Semen Analysis) से पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
उत्तर: आमतौर पर, डॉक्टर आपको टेस्ट से 2 से 5 दिन पहले तक किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि (स्खलन) से परहेज करने की सलाह देते हैं। सही सैंपल कलेक्शन के लिए हॉस्पिटल का स्टाफ आपको पूरी जानकारी देगा।
प्रश्न 5: क्या पुरुष बांझपन के इलाज की प्रक्रिया दर्दनाक होती है?
उत्तर: अधिकांश जांच और इलाज की प्रक्रियाएं दर्द रहित होती हैं। ब्लड टेस्ट में बस एक सुई चुभने जितना दर्द होता है। सर्जरी या TESA/PESA जैसी प्रक्रियाएं एनेस्थीसिया देकर की जाती हैं, इसलिए आपको दर्द महसूस नहीं होता।
प्रश्न 6: क्या लैपटॉप को गोद में रखने से वाकई फर्टिलिटी पर असर पड़ता है?
उत्तर: हाँ, लंबे समय तक लैपटॉप को सीधे गोद में रखकर काम करने से निकलने वाली गर्मी अंडकोष के तापमान को बढ़ा सकती है, जो शुक्राणु उत्पादन के लिए अच्छा नहीं है। बेहतर है कि लैपटॉप को टेबल पर रखकर या गोद में कुशन या लैप-डेस्क रखकर इस्तेमाल करें।
Consult Now
