Get Cost on Whatsapp Phone
Whatsapp
Phone

वेरीकोज वेन का इलाज: एक विस्तृत और सरल गाइड

वेरीकोज एक आम समस्या है, जो खासकर उन लोगों को होती है जिन्हें लंबे समय तक खड़े रहना या बैठना पड़ता है। कई बार लोग इसे सिर्फ एक खूबसूरती से जुड़ी समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह इससे कहीं बढ़कर है। सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह दर्द, सूजन और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

अच्छी खबर यह है कि आज वेरीकोज वेन का इलाज बहुत सुरक्षित और प्रभावी हो गया है। SCI हॉस्पिटल जैसे विशेषज्ञ केंद्रों में, हमारी टीम उन्नत तकनीकों का उपयोग करके हजारों मरीजों को इस समस्या से छुटकारा दिला चुकी है। चलिए, इस सफर में आगे बढ़ते हैं और वेरीकोज वेन के बारे में सब कुछ जानते हैं।

We Are Rated

Consult Now

वेरीकोज वेन क्या हैं और क्यों होती हैं?


इलाज के बारे में जानने से पहले, यह समझना जरूरी है कि आखिर यह समस्या है क्या और यह होती क्यों है। इससे आपको इलाज के विकल्पों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

वेरीकोज वेन को आसान भाषा में समझें


हमारे शरीर में दो तरह की खून की नसें होती हैं - एक जो दिल से शरीर तक साफ खून ले जाती हैं (धमनियां) और दूसरी जो शरीर से गंदा खून वापस दिल तक लाती हैं (शिराएं या नसें)। पैरों की नसों को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध खून को ऊपर की ओर, यानी दिल की तरफ भेजना होता है।

इस काम में नसों की मदद के लिए उनके अंदर छोटे-छोटे 'वाल्व' या 'एक-तरफा गेट' लगे होते हैं। जब खून ऊपर जाता है तो ये वाल्व खुल जाते हैं और फिर तुरंत बंद हो जाते हैं ताकि खून वापस नीचे न बहे।

वेरीकोज वेन की समस्या तब शुरू होती है जब ये वाल्व कमजोर हो जाते हैं या खराब हो जाते हैं। खराब वाल्व ठीक से बंद नहीं हो पाते, जिससे खून नीचे की ओर वापस बहने लगता है और नसों में जमा होने लगता है।

वेरीकोज वेन के लक्षण क्या हैं?


वेरीकोज वेन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को कोई तकलीफ नहीं होती, जबकि कुछ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके कुछ आम लक्षण इस प्रकार हैं:

  • उभरी हुई नसें: पैरों पर, खासकर पिंडलियों और जांघों पर, नीले या गहरे बैंगनी रंग की नसें दिखना जो त्वचा से उभरी हुई और रस्सी की तरह मुड़ी हुई हों।
  • पैरों में दर्द: पैरों में भारीपन, थकावट या दर्द महसूस होना, जो लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने के बाद बढ़ जाता है।
  • जलन और ऐंठन: मांसपेशियों में ऐंठन, जलन या धमक जैसा महसूस होना, खासकर रात के समय।
  • सूजन: दिन के अंत में टखनों और पैरों में सूजन आ जाना।
  • खुजली: प्रभावित नसों के आसपास की त्वचा में तेज खुजली होना।
  • त्वचा का रंग बदलना: टखनों के आसपास की त्वचा का रंग गहरा पड़ जाना या त्वचा का पतला हो जाना।

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना चाहिए?


यदि आपको इनमें से कोई भी गंभीर लक्षण दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • अचानक तेज दर्द और सूजन: यह खून का थक्का (DVT) बनने का संकेत हो सकता है।
  • घाव या छाला: नसों के पास कोई ऐसा घाव जो ठीक नहीं हो रहा हो (वीनस अल्सर)।
  • खून बहना: उभरी हुई नस से अचानक खून बहना।
  • त्वचा का सख्त होना: प्रभावित हिस्से की त्वचा का लाल, गर्म और सख्त हो जाना।

वेरीकोज वेन होने के कारण और जोखिम


यह समझना महत्वपूर्ण है कि कुछ लोगों को यह समस्या क्यों होती है और दूसरों को नहीं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख जोखिम कारक नीचे दिए गए हैं:

  • उम्र: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, नसों के वाल्व कमजोर होने लगते हैं, जिससे वेरीकोज वेन का खतरा बढ़ जाता है।
  • लिंग: महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक आम है। हार्मोनल बदलाव, जैसे गर्भावस्था, पीरियड्स या मेनोपॉज, नसों की दीवारों को कमजोर कर सकते हैं।
  • पारिवारिक इतिहास: अगर आपके परिवार में किसी को यह समस्या है, तो आपको भी होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • मोटापा: शरीर का अतिरिक्त वजन पैरों की नसों पर अधिक दबाव डालता है, जिससे वाल्व खराब हो सकते हैं।
  • लंबे समय तक खड़े रहना या बैठना: ऐसी नौकरियां जिनमें लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना पड़ता है (जैसे शिक्षक, ट्रैफिक पुलिस, आईटी प्रोफेशनल, दुकानदार), खून के प्रवाह को धीमा कर देती हैं, जिससे नसों पर दबाव बढ़ता है।
  • गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है, लेकिन पैरों से श्रोणि (pelvis) तक खून का प्रवाह कम हो जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव वेरीकोज वेन का कारण बन सकता है।

वेरीकोज वेन का निदान (Diagnosis)


जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वे सही इलाज तय करने के लिए कुछ जांच करते हैं। निदान की प्रक्रिया आमतौर पर बहुत सरल होती है।

  • शारीरिक जांच: डॉक्टर सबसे पहले आपके पैरों की जांच करेंगे। वे आपसे खड़े होने और बैठने के लिए कह सकते हैं ताकि वे नसों को ठीक से देख सकें। वे आपसे आपके लक्षणों, दर्द और पारिवारिक इतिहास के बारे में पूछेंगे।
  • कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड (Colour Doppler Ultrasound): यह सबसे महत्वपूर्ण और आम टेस्ट है। यह एक विशेष प्रकार का अल्ट्रासाउंड है, जिसमें कोई दर्द नहीं होता। इस टेस्ट से डॉक्टर आपकी नसों के अंदर खून के प्रवाह को देख सकते हैं। यह बताता है कि वाल्व ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, और क्या कहीं खून का थक्का तो नहीं बना है। यह रिपोर्ट इलाज की दिशा तय करने में सबसे ज्यादा मदद करती है।

इलाज के विकल्प


वेरीकोज वेन का इलाज अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो गया है। इलाज का चुनाव आपकी स्थिति की गंभीरता, नसों के आकार और आपकी सेहत पर निर्भर करता है। SCI हॉस्पिटल में, हम मरीज की पूरी जांच के बाद ही सबसे उपयुक्त इलाज की सलाह देते हैं। आइए, इलाज के विभिन्न विकल्पों को विस्तार से जानते हैं।

जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes)

हल्के मामलों में, या इलाज के साथ-साथ, जीवनशैली में कुछ साधारण बदलाव करने से लक्षणों में काफी राहत मिल सकती है और समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

  • व्यायाम: नियमित रूप से टहलना, जॉगिंग, साइकिल चलाना या तैरना। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जो खून को ऊपर भेजने में मदद करती हैं।
  • वजन नियंत्रण: अगर आपका वजन ज्यादा है, तो उसे कम करने से नसों पर दबाव कम होता है।
  • पैरों को ऊंचा रखना: जब भी मौका मिले, दिन में 3-4 बार 15-20 मिनट के लिए अपने पैरों को दिल के स्तर से ऊपर उठाकर रखें।
  • लंबे समय तक खड़े या बैठे रहने से बचें: हर 30-40 मिनट में अपनी स्थिति बदलें। थोड़ा चलें-फिरें या पैरों को स्ट्रेच करें।
  • सही कपड़े पहनें: बहुत तंग कपड़े, खासकर कमर और जांघों पर, पहनने से बचें क्योंकि वे खून के बहाव को रोक सकते हैं। ऊंची हील की बजाय आरामदायक जूते पहनें।
Dr. Vishal Dutt Gour

MBBS, MS - General Surgery, MCh - Urology/Genito-Urinary Surgery, Urologist,Urological Surgeon,Andrologist

  • Urologist,Urological Surgeon,Andrologist
  • 22+ Years Experience
Dr. Gautam Banga

MBBS, MS - General Surgery, MCh - Urology, Urologist, Andrologist, Urological Surgeon

  • Urologist, Andrologist, Urological Surgeon
  • 19+ Years Experience

संपीड़न स्टॉकिंग्स (Compression Stockings)


ये खास तरह के मोजे होते हैं जो पैरों पर एक समान दबाव डालते हैं। यह दबाव टखनों पर सबसे ज्यादा होता है और ऊपर की ओर धीरे-धीरे कम होता जाता है।

यह कैसे काम करते हैं?

यह बाहरी दबाव नसों को सिकुड़ने में मदद करता है, जिससे वाल्व को ठीक से काम करने में आसानी होती है और खून का बहाव दिल की ओर सुधरता है। यह सूजन और दर्द को कम करने में बहुत प्रभावी हैं।

किसे पहनना चाहिए?

डॉक्टर अक्सर हल्के लक्षणों वाले मरीजों को, गर्भवती महिलाओं को या फिर इलाज के बाद सपोर्ट के लिए इन्हें पहनने की सलाह देते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें:

स्टॉकिंग्स सही साइज और सही दबाव वाली होनी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इन्हें सुबह उठते ही पहन लेना चाहिए और रात को सोने से पहले उतार देना चाहिए।

स्क्लेरोथेरेपी (Sclerotherapy)

यह प्रक्रिया छोटी और मध्यम आकार की वेरीकोज वेन और स्पाइडर वेन (मकड़ी के जाले जैसी नसें) के लिए बहुत प्रभावी है।

यह कैसे काम करती है?

इसमें डॉक्टर एक बहुत ही पतली सुई के माध्यम से प्रभावित नस में एक विशेष केमिकल घोल (स्क्लेरोजेंट) का इंजेक्शन लगाते हैं। यह घोल नस की अंदरूनी परत को परेशान करता है, जिससे वह सूजकर बंद हो जाती है और आपस में चिपक जाती है। समय के साथ, यह बंद नस एक निशान में बदल जाती है और शरीर द्वारा सोख ली जाती है, जिससे वह दिखाई देना बंद हो जाती है।

प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

यह एक OPD प्रक्रिया है, जिसमें 15 से 30 मिनट लगते हैं। आप प्रक्रिया के तुरंत बाद घर जा सकते हैं।

क्या यह दर्दनाक है?

इंजेक्शन के समय हल्की चुभन या जलन महसूस हो सकती है, लेकिन यह आमतौर पर सहने योग्य होती है।

इसके बाद क्या होता है?

डॉक्टर आपको कुछ दिनों के लिए कंप्रेशन स्टॉकिंग्स पहनने की सलाह देंगे। पूरी तरह से परिणाम दिखने में कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक का समय लग सकता है।

लेजर थेरेपी (Endovenous Laser Therapy - EVLT)


यह बड़ी वेरीकोज वेन के इलाज के लिए सबसे लोकप्रिय और आधुनिक तरीकों में से एक है। SCI हॉस्पिटल में इस प्रक्रिया को विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा बड़ी सफलता के साथ किया जाता है।

यह कैसे काम करती है?

यह एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, यानी इसमें कोई बड़ा कट या टांका नहीं लगता।

  • सबसे पहले, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की मदद से खराब नस का पता लगाते हैं।
  • उस हिस्से को सुन्न करने के लिए एक लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया जाता है।
  • एक छोटा सा कट लगाकर, नस के अंदर एक पतली लेजर फाइबर डाली जाती है।
  • डॉक्टर धीरे-धीरे फाइबर को बाहर निकालते समय लेजर ऊर्जा छोड़ते हैं। यह ऊर्जा नस के अंदर तीव्र गर्मी पैदा करती है, जिससे नस तुरंत बंद हो जाती है।
  • खून का प्रवाह अपने आप स्वस्थ नसों की ओर मुड़ जाता है। बंद हो चुकी नस धीरे-धीरे शरीर में घुल जाती है।

इसके फायदे क्या हैं?

  • बहुत कम दर्द होता है।
  • रिकवरी बहुत तेज होती है; मरीज उसी दिन घर जा सकता है और 1-2 दिनों में अपने सामान्य काम पर लौट सकता है।
  • सफलता दर बहुत अधिक है (98% तक)।
  • कोई बड़ा निशान नहीं पड़ता।

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (Radiofrequency Ablation - RFA)

यह प्रक्रिया EVLT की तरह ही है, लेकिन इसमें लेजर ऊर्जा की जगह रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। एक पतले कैथेटर के माध्यम से नस में गर्मी पहुंचाई जाती है, जिससे वह बंद हो जाती है। इसके परिणाम और फायदे भी EVLT के समान ही हैं।

सर्जरी (वेन लिगेशन और स्ट्रिपिंग)

यह वेरीकोज वेन के इलाज का पारंपरिक तरीका है। आज इसका उपयोग केवल बहुत गंभीर मामलों में किया जाता है, जब अन्य आधुनिक तरीके उपयुक्त नहीं होते।

यह कैसे काम करती है?

इसमें सर्जन जांघ या घुटने के पास एक कट लगाकर मुख्य खराब नस को बांध देते हैं (लिगेशन) और फिर एक विशेष उपकरण का उपयोग करके उस नस को बाहर निकाल देते हैं (स्ट्रिपिंग)।

इसमें क्या शामिल है?

इस प्रक्रिया के लिए आमतौर पर स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया की आवश्यकता होती है और हॉस्पिटल में एक या दो दिन रुकना पड़ सकता है। रिकवरी में भी 2 से 4 सप्ताह लग सकते हैं। आधुनिक तरीकों की तुलना में इसमें दर्द और निशान पड़ने की संभावना अधिक होती है।

कैसे चुनें सही इलाज?

इतने सारे विकल्पों के बीच, यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है। सही इलाज का चुनाव कई बातों पर निर्भर करता है, और यह फैसला हमेशा एक विशेषज्ञ डॉक्टर के साथ मिलकर ही लेना चाहिए।

आपकी स्थिति की गंभीरता

  • हल्के मामले: अगर आपको सिर्फ मकड़ी जैसी नसें हैं या हल्की उभरी नसें हैं जिनमें ज्यादा दर्द नहीं है, तो जीवनशैली में बदलाव और कंप्रेशन स्टॉकिंग्स से शुरुआत की जा सकती है।
  • मध्यम मामले: यदि नसें अधिक उभरी हुई हैं, दर्द होता है या सूजन रहती है, तो स्क्लेरोथेरेपी, EVLT या RFA जैसे विकल्प बेहतर हो सकते हैं।
  • गंभीर मामले: त्वचा में बदलाव, घाव (अल्सर) या बहुत बड़ी और मुड़ी हुई नसों के लिए EVLT, RFA या कुछ मामलों में सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

आपकी उम्र और सामान्य स्वास्थ्य

आपकी उम्र, वजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे हृदय रोग या डायबिटीज) भी इलाज के चुनाव को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, एक बुजुर्ग व्यक्ति या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के लिए न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया जैसे EVLT या स्क्लेरोथेरेपी, पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक सुरक्षित हो सकती है।

इलाज का खर्च और बजट

इलाज का खर्च भी एक महत्वपूर्ण कारक है। भारत में इलाज की लागत शहर और हॉस्पिटल के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

  • स्क्लेरोथेरेपी: आमतौर पर कई सत्रों की आवश्यकता होती है।
  • EVLT/RFA: यह एक बार की प्रक्रिया है। यह महंगा लग सकता है, लेकिन इसकी उच्च सफलता दर और तेज रिकवरी इसे लंबे समय में एक बेहतर विकल्प बनाती है।
  • सर्जरी: पारंपरिक सर्जरी का खर्च भी आधुनिक प्रक्रियाओं के बराबर या थोड़ा कम हो सकता है।

कई हॉस्पिटल्स में इंश्योरेंस कवरेज और ईएमआई (EMI) की सुविधा भी उपलब्ध होती है। SCI हॉस्पिटल में हम मरीजों को पारदर्शी मूल्य निर्धारण और भुगतान के लचीले विकल्प प्रदान करने में मदद करते हैं।

SCI हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से सलाह

सबसे महत्वपूर्ण कदम एक अनुभवी वैस्कुलर विशेषज्ञ या जनरल सर्जन से परामर्श करना है। SCI हॉस्पिटल में, हमारी टीम पहले आपकी पूरी जांच करती है, कलर डॉपलर टेस्ट करती है, और फिर आपके साथ बैठकर सभी विकल्पों पर चर्चा करती है। हम आपकी जीवनशैली, बजट और उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए एक व्यक्तिगत उपचार योजना बनाते हैं।

घरेलू उपाय और जीवनशैली में सुधार


मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ-साथ कुछ घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव आपके लक्षणों को नियंत्रित करने और नई वेरीकोज वेन को बनने से रोकने में बहुत मददगार हो सकते हैं।

सही खान-पान और डाइट

आपका आहार नसों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव डालता है। एक संतुलित आहार वजन को नियंत्रित रखने और नसों की दीवारों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

  • फाइबर युक्त भोजन खाएं: कब्ज से नसों पर दबाव बढ़ता है। इसलिए, अपने आहार में भरपूर फाइबर शामिल करें। इसके लिए आप साबुत अनाज (दलिया, ब्राउन राइस), दालें, फल (पपीता, सेब) और हरी सब्जियां (पालक, बीन्स) खा सकते हैं।
  • फ्लेवोनोइड्स युक्त चीजें: ये तत्व खून के प्रवाह को बेहतर बनाते हैं और नसों को मजबूत करते हैं। ये प्याज, लहसुन, अदरक, पालक, ब्रोकली और खट्टे फलों (संतरा, नींबू) में पाए जाते हैं।
  • पोटेशियम युक्त आहार: पोटेशियम शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जिससे सूजन कम होती है। इसके लिए आप दाल, आलू, पत्तेदार सब्जियां और मछली का सेवन कर सकते हैं।
  • नमक कम करें: ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी रुकता है, जिससे सूजन बढ़ सकती है। पैकेट वाले खाद्य पदार्थों और अचार से बचें।
  • खूब पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेटेड रखने से खून का प्रवाह सुचारू रहता है।

व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ

नियमित व्यायाम वेरीकोज वेन के लिए सबसे अच्छे प्राकृतिक उपचारों में से एक है।

  • टहलना: रोजाना 30 मिनट की तेज चाल आपके पैरों की मांसपेशियों (calf muscles) को सक्रिय करती है, जो 'दूसरे दिल' की तरह काम करती हैं और खून को ऊपर पंप करती हैं।
  • साइकिल चलाना: यह जोड़ों पर बिना दबाव डाले पैरों की मांसपेशियों के लिए एक बेहतरीन कसरत है।
  • योग: कुछ योगासन, जैसे 'विपरीत करणी' (पैरों को दीवार के सहारे ऊपर उठाना), खून के प्रवाह को हृदय की ओर ले जाने में बहुत प्रभावी होते हैं।

इलाज के बाद क्या उम्मीद करें?


इलाज कराने का निर्णय लेने के बाद, यह जानना स्वाभाविक है कि प्रक्रिया के बाद क्या होगा।

रिकवरी का समय

  • स्क्लेरोथेरेपी: आप तुरंत अपनी सामान्य गतिविधियों पर लौट सकते हैं। कुछ दिनों तक भारी व्यायाम से बचने की सलाह दी जाती है।
  • EVLT/RFA: आप उसी दिन घर जा सकते हैं। ज्यादातर लोग 1-2 दिनों में काम पर लौट जाते हैं। आपको कुछ हफ्तों तक कंप्रेशन स्टॉकिंग्स पहनने की आवश्यकता होगी।
  • सर्जरी: पूरी तरह ठीक होने में 2 से 4 सप्ताह लग सकते हैं। इस दौरान आपको आराम करने और भारी काम से बचने की जरूरत होगी।

लंबे समय के परिणाम

आधुनिक उपचार जैसे EVLT और RFA की सफलता दर बहुत अधिक है। इलाज की गई नसें आमतौर पर वापस नहीं आती हैं। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह इलाज नई वेरीकोज वेन बनने की प्रवृत्ति को नहीं बदल सकता। इसलिए, इलाज के बाद भी स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि भविष्य में यह समस्या दोबारा न हो।

सावधानियां और जटिलताएं


वेरीकोज वेन को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर इलाज न कराने से कई गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

इलाज में देरी के खतरे

लगातार दर्द और सूजन:

समय के साथ दर्द और भारीपन बढ़ सकता है, जिससे आपकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

त्वचा के अल्सर (Venous Ulcers):

नसों में लगातार दबाव के कारण त्वचा के ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे टखनों के पास दर्दनाक घाव बन सकते हैं जो आसानी से ठीक नहीं होते।

खून बहना:

उभरी हुई नसें त्वचा के बहुत करीब होती हैं। हल्की सी चोट लगने पर भी इनसे बहुत तेजी से खून बह सकता है।

खून के थक्के:

  • सुपरफिशियल थ्रोम्बोफ्लिबिटिस (Superficial Thrombophlebitis): त्वचा के ठीक नीचे की नसों में खून के थक्के बन सकते हैं, जिससे नस सख्त हो जाती है और उसमें तेज दर्द होता है।
  • डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep Vein Thrombosis - DVT): यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर के अंदर की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जो जानलेवा हो सकता है।

वेरीकोज वेन से जुड़े मिथक और तथ्य


वेरीकोज वेन को लेकर समाज में कई गलत धारणाएं हैं। आइए कुछ आम मिथकों का सच जानते हैं।

मिथक 1: यह सिर्फ एक कॉस्मेटिक समस्या है।

तथ्य: नहीं, यह एक मेडिकल कंडीशन है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह दर्द, सूजन, अल्सर और खतरनाक ब्लड क्लॉट का कारण बन सकती है।

मिथक 2: पैर पर पैर चढ़ाकर बैठने से वेरीकोज वेन होती है।

तथ्य: इस बात का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हालांकि, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से खून का प्रवाह बाधित हो सकता है, जो एक जोखिम कारक है।

मिथक 3: केवल बूढ़े लोगों को वेरीकोज वेन होती है।

तथ्य: हालांकि उम्र एक जोखिम कारक है, लेकिन यह समस्या युवाओं को भी हो सकती है, खासकर यदि उनके परिवार में इसका इतिहास हो या वे मोटापे से ग्रस्त हों।

मिथक 4: सर्जरी ही एकमात्र इलाज है।

तथ्य: यह बिल्कुल गलत है। आज EVLT, RFA और स्क्लेरोथेरेपी जैसी कई न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं जो सर्जरी से कहीं ज्यादा सुरक्षित, कम दर्दनाक और तेज रिकवरी वाली हैं।

FAQs

नहीं, एक बार जब नसें फैल जाती हैं और वाल्व खराब हो जाते हैं, तो वे अपने आप ठीक नहीं हो सकतीं। हालांकि, जीवनशैली में बदलाव से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।

लेजर (EVLT) और स्क्लेरोथेरेपी जैसी आधुनिक प्रक्रियाओं में बहुत कम दर्द होता है। प्रक्रिया के दौरान लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे आपको कुछ भी महसूस नहीं होता। बाद में हल्की असुविधा हो सकती है, जिसे साधारण दर्द निवारक दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है।

इलाज की गई नसें वापस नहीं आती हैं। लेकिन, अगर आप जोखिम कारकों (जैसे मोटापा, hareketsiz जीवनशैली) पर ध्यान नहीं देते हैं, तो दूसरी नसों में यह समस्या विकसित हो सकती है। इसीलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है।

आप SCI हॉस्पिटल के जनरल और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग में हमारे विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं। आप हमारी वेबसाइट पर जाकर या हमारे हॉस्पिटल के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार है।

Consult Now