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दिल्ली में घुटना प्रत्यारोपण (टोटल नी रिप्लेसमेंट): दर्द से मुक्ति और नया जीवन

आज के समय में घुटनों का दर्द एक बेहद आम स्वास्थ्य समस्या बन गया है। यह खासकर बढ़ती उम्र के साथ, पुरानी चोट लगने के बाद, अधिक वजन होने पर या गठिया (आर्थराइटिस) जैसी बीमारियों के कारण तेजी से बढ़ता है। घुटनों में लगातार दर्द, सूजन और जकड़न सिर्फ चलने-फिरने की क्षमता को ही कम नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम भी दूभर बना देती है।

इस दर्द के कारण कई लोग अपनी पसंदीदा गतिविधियों जैसे बाजार जाना, सीढ़ियां चढ़ना, पूजा में पालथी मारकर बैठना, या बच्चों के साथ खेलना तक छोड़ देते हैं। जब दवाएं, नियमित फिजियोथेरेपी और इंजेक्शन जैसे उपचारों से भी लगातार दर्द में आराम नहीं मिलता, तब घुटना प्रत्यारोपण, जिसे टोटल नी रिप्लेसमेंट (Total Knee Replacement - TKR) भी कहा जाता है, एक भरोसेमंद और लंबे समय तक आराम देने वाला प्रभावी विकल्प साबित होता है। दिल्ली स्थित एस.सी.आई. हॉस्पिटल (SCI Hospital) में अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन, आधुनिक रोबोटिक तकनीक, एडवांस्ड पेन-मैनेजमेंट (दर्द प्रबंधन) प्रणाली और एक समर्पित फिजियोथेरेपी टीम के साथ, इस सर्जरी के पूरे सफर को सुरक्षित, पारदर्शी और तेज़ रिकवरी वाला बनाया जाता है।

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क्या घुटनों का असहनीय दर्द आपको चलने-फिरने से रोक रहा है? आप अकेले नहीं हैं


यदि आप घुटनों के दर्द से जूझ रहे हैं जो आपकी दैनिक गतिविधियों को बाधित कर रहा है, तो आप इस समस्या का सामना करने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं। लाखों लोग घुटनों के दर्द के कारण होने वाली शारीरिक सीमाओं और मानसिक तनाव से प्रभावित हैं। इस दर्द के कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।

सीढ़ियां चढ़ना, बाजार जाना या बैठ कर उठना मुश्किल क्यों हो जाता है?


घुटना एक जटिल हिंज-जॉइंट (Hinge-Joint) जैसा है, जो दरवाजे के कब्जे की तरह सिर्फ एक ही दिशा में मुड़ता और सीधा होता है। इस जोड़ के भीतर कार्टिलेज एक प्राकृतिक "ग्रेस" या स्नेहक (Lubricant) की तरह काम करता है, जिससे हड्डियां एक-दूसरे पर आसानी से फिसलती हैं और कोई घर्षण नहीं होता। जब यह कार्टिलेज की परत घिस जाती है या क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो घुटने की हड्डियां सीधे एक-दूसरे से रगड़ने लगती हैं।

इस हड्डी-पर-हड्डी रगड़ के कारण गंभीर सूजन, असहनीय दर्द और कड़काहट पैदा होती है। समय के साथ, यह रगड़ घुटने की संरचना को बदल सकती है, जिससे घुटने "टेढ़े" दिखाई देने लगते हैं (वेरस यानी धनुषाकार पैर या वैल्गस यानी नॉक-नी डिफॉर्मिटी)। यह विकृति चाल को और बिगाड़ देती है और घुटने पर अनावश्यक दबाव डालती है। यही कारण है कि सीढ़ियां चढ़ना, कुर्सी से उठना, जमीन पर नमाज़ या पालथी में बैठना और यहां तक कि सामान्य रूप से टहलना भी दर्दनाक और मुश्किल हो जाता है।

घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी में, घिसी हुई हड्डी की सतहों को हटा दिया जाता है। उनकी जगह पर धातु और प्लास्टिक के बने "नई चिकनी सतह" (कृत्रिम इम्प्लांट) लगाए जाते हैं। ये इम्प्लांट घर्षण को पूरी तरह रोक देते हैं, जिससे दर्द खत्म हो जाता है और घुटने की मूवमेंट फिर से आसान और सहज हो जाती है।

SCI हॉस्पिटल का संकल्प: हैं आपको सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि दर्द-मुक्त और सक्रिय जीवन वापस देना


एस.सी.आई. हॉस्पिटल में हम सिर्फ सर्जरी पर ही ध्यान नहीं देते, बल्कि हमारा लक्ष्य आपको एक दर्द-मुक्त और सक्रिय जीवन वापस लौटाना है। हम समझते हैं कि यह एक बड़ा कदम है और हम हर कदम पर आपके साथ हैं।

अनुभवी और समन्वित टीम

हमारे पास जॉइंट रिप्लेसमेंट में अत्यधिक दक्ष ऑर्थोपेडिक सर्जनों की टीम है। इसके साथ ही, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, समर्पित नर्सिंग स्टाफ और कुशल फिजियोथेरेपिस्ट भी एक ही छत के नीचे मिलकर काम करते हैं। यह समन्वित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि आपको सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान और उसके बाद बेहतरीन देखभाल मिले।

ईआरएएस (ERAS) प्रोटोकॉल

"एन्हांस्ड रिकवरी आफ्टर सर्जरी" (Enhanced Recovery After Surgery) एक आधुनिक प्रोटोकॉल है जिसका पालन हम करते हैं। इसका उद्देश्य दर्द को कम करना, सर्जरी के बाद रोगी को जल्दी चलना-फिरना शुरू करवाना और अस्पताल में रहने की अवधि को कम करना है। यह सब मिलकर रोगी को तेज़ और प्रभावी रिकवरी में मदद करता है।

एडवांस्ड पेन-मैनेजमेंट (दर्द प्रबंधन)

हम सर्जरी के बाद के दर्द को न्यूनतम रखने के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग करते हैं। इसमें मल्टी-मोडल दवाएं (एक साथ कई तरह की दर्द निवारक दवाएं), क्षेत्रीय एनेस्थीसिया (शरीर के एक हिस्से को सुन्न करना) या नर्व-ब्लॉक्स (तंत्रिका को ब्लॉक करना), और स्थानीय एनाल्जेसिया (सर्जरी वाले क्षेत्र में सीधे दर्द निवारक देना) शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है कि आपकी रिकवरी अधिक आरामदायक हो।

व्यक्तिगत फिजियोथेरेपी

आपकी सर्जरी के अगले ही दिन से फिजियोथेरेपी शुरू हो जाती है। सबसे पहले वॉकर के साथ चलना सिखाया जाता है। धीरे-धीरे रेंज ऑफ़ मोशन (ROM - घुटने को मोड़ने-सीधा करने की क्षमता) और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम सिखाए जाते हैं। इसमें सीढ़ियों की ट्रेनिंग और आपके घर के लिए एक कस्टम व्यायाम योजना भी शामिल होती है, ताकि आप पूरी तरह से ठीक हो सकें।

पारदर्शी लागत और देखभाल

हम सर्जरी से जुड़ी लागत के बारे में पूरी पारदर्शिता रखते हैं। आइटम-वाइज़ पैकेज की जानकारी दी जाती है, साथ ही इंश्योरेंस क्लेम और ईएमआई (EMI) सहायता भी प्रदान की जाती है। सर्जरी के बाद की देखभाल के लिए एक व्यवस्थित फॉलो-अप शेड्यूल भी तय किया जाता है, ताकि आपकी प्रगति की लगातार निगरानी की जा सके।

क्यों दिल्ली के मरीज़ घुटना प्रत्यारोपण के लिए SCI हॉस्पिटल पर भरोसा करते हैं?


दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के मरीज़ घुटना प्रत्यारोपण के लिए एस.सी.आई. हॉस्पिटल पर इसलिए भरोसा करते हैं, क्योंकि हम उन्हें सिर्फ चिकित्सा सेवा ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार का अनुभव प्रदान करते हैं।

हमारे विशेषज्ञ सर्जन, सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, आपके भरोसेमंद साथी

  • हाई-वॉल्यूम अनुभव: हमारे ऑर्थोपेडिक सर्जनों के पास हजारों टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) सर्जरी करने का व्यापक अनुभव है। इसमें जटिल और रिविजन (पुरानी सर्जरी को ठीक करना) के केस भी शामिल हैं, जिससे उनके मजबूत रिकॉर्ड और विशेषज्ञता का पता चलता है।
  • जटिल केस मैनेजमेंट: हम टेढ़े पैरों, पुरानी चोटों या पिछली सर्जरी के बाद उत्पन्न हुई जटिलताओं वाले मामलों में भी सटीक योजना और सुरक्षित सर्जरी सुनिश्चित करते हैं। हमारी टीम ऐसे मामलों में विशेष विशेषज्ञता रखती है।
  • पारदर्शी काउंसलिंग: हमारे सर्जन मरीजों को सर्जरी के फायदे-जोखिम, विभिन्न इम्प्लांट (कृत्रिम जोड़) विकल्पों, रोबोटिक या पारंपरिक सर्जरी के बीच अंतर, और रिकवरी टाइमलाइन जैसी सभी जानकारी सरल और आसान भाषा में समझाते हैं। यह मरीजों को सूचित निर्णय लेने में मदद करता है।

हमारे वरिष्ठ विशेषज्ञ सर्जन 20+ वर्षों का अनुभव और 10,000+ सफल सर्जरी:

हमारे वरिष्ठ विशेषज्ञ सर्जन को हिप (कूल्हा) और नी (घुटना) रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में एक अग्रणी नाम के रूप में जाना जाता है। उनके पास 20 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है और उन्होंने 10,000 से अधिक सफल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की हैं। वे एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम (कई विशेषज्ञताओं वाली टीम) का नेतृत्व करते हैं और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए लगातार बेहतर परिणाम प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रोबोटिक तकनीक: इसका आपके लिए क्या मतलब है?

एस.सी.आई. हॉस्पिटल में उपयोग की जाने वाली रोबोटिक तकनीक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी को और भी सटीक और प्रभावी बनाती है, जिससे मरीज़ों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं:

3D प्री-प्लानिंग (त्रिविमीय पूर्व-योजना):

सर्जरी से पहले, आपके घुटने की बनावट का एक विस्तृत डिजिटल 3D मॉडल बनाया जाता है। इस मॉडल का उपयोग करके, सर्जन पहले से ही हड्डी को काटने के कोण, इम्प्लांट के एलाइनमेंट (सही स्थिति) और घुटने के संतुलन की सटीक योजना बना लेते हैं। इससे सर्जरी के दौरान अप्रत्याशितता कम होती है।

सब-मिलीमीटर सटीकता:

रोबोटिक आर्म (रोबोटिक भुजा) सर्जन को हड्डी की कटिंग और इम्प्लांट की पोजीशन में सब-मिलीमीटर स्तर की सटीकता प्रदान करता है। यह सटीकता घुटने के जोड़ के संतुलन को बेहतर बनाती है और आसपास के कोमल ऊतकों (मांसपेशियों, लिगामेंट्स) को कम से कम नुकसान पहुंचाती है।

टिशू-फ्रेंडली (ऊतक-अनुकूल):

रोबोटिक सर्जरी में अक्सर छोटा चीरा लगाया जाता है, जिससे रक्त का नुकसान कम होता है। इसके परिणामस्वरूप सर्जरी के बाद दर्द भी कम होता है और रोगी की रिकवरी तेजी से होती है।

लंबे समय का फायदा:

इम्प्लांट का अत्यधिक सटीक एलाइनमेंट और सही फिटिंग, इम्प्लांट पर अनावश्यक घिसाव को कम करता है। यह घिसाव कम होने से इम्प्लांट की उम्र बढ़ने की संभावना रहती है, यानी यह लंबे समय तक चल सकता है।

इम्प्लांट का परफेक्ट अलाइनमेंट, जो सालों तक टिकता है: रोबोटिक तकनीक से इम्प्लांट को घुटने में इतनी सटीकता से लगाया जाता है कि वह वर्षों तक अपनी जगह पर सही बना रहता है।

  • सही फिटिंग से चाल नैचुरल लगती है और अनावश्यक दबाव कम होता है: इम्प्लांट की सटीक फिटिंग से सर्जरी के बाद आपकी चाल प्राकृतिक लगती है और घुटने पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव कम हो जाता है।
  • मरीज लंबे समय तक आराम से चल-फिर सकते हैं: इन सभी फायदों के कारण, मरीज सर्जरी के बाद लंबे समय तक बिना दर्द के आराम से चल-फिर सकते हैं और अपनी दैनिक गतिविधियों को जारी रख सकते हैं।
  • तेज़ी से रिकवरी: छोटा चीरा, कम दर्द और आप अगले ही दिन चलेंगे: रोबोटिक सर्जरी में छोटा चीरा लगने और दर्द प्रबंधन की बेहतर तकनीकों के कारण, अधिकांश मरीज़ सर्जरी के अगले ही दिन वॉकर के सहारे चलना शुरू कर देते हैं।
  • ERAS के साथ डे-1 मोबिलाइजेशन, जल्दी फिजियो और जल्दी डिस्चार्ज: ERAS प्रोटोकॉल के तहत, पहले दिन से ही गतिशीलता (मोबिलाइजेशन) शुरू कर दी जाती है, जिससे फिजियोथेरेपी भी जल्दी शुरू होती है और अस्पताल से छुट्टी भी जल्दी मिलती है।
  • ऑफिस/दैनिक कामों में वापसी की टाइमलाइन स्पष्ट होती है: डॉक्टर और फिजियोथेरेपी टीम आपकी रिकवरी के चरणों के बारे में स्पष्ट जानकारी देते हैं, जिससे आपको ऑफिस या दैनिक कामों में वापसी की एक अनुमानित टाइमलाइन मिल पाती है।

दर्द-मुक्त सर्जरी का अनुभव: हमारी एडवांस्ड पेन मैनेजमेंट तकनीक से


एस.सी.आई. हॉस्पिटल में हम यह सुनिश्चित करते हैं कि घुटना प्रत्यारोपण के बाद आपका दर्द न्यूनतम हो, जिससे आपकी रिकवरी अधिक सहज और आरामदायक बन सके। इसके लिए हम एडवांस्ड पेन मैनेजमेंट तकनीकों का उपयोग करते हैं:

मल्टी-मोडल पेन-मैनेजमेंट (बहु-विध दर्द प्रबंधन):

यह कई अलग-अलग तरीकों से दर्द को नियंत्रित करने की रणनीति है। इसमें शामिल हैं:

स्पाइनल/रीजनल एनेस्थीसिया:

सर्जरी के दौरान शरीर के निचले हिस्से को सुन्न करने के लिए यह तकनीक इस्तेमाल की जाती है। लोकल एनाल्जेसिया: सर्जरी वाले क्षेत्र में सीधे दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं, जो तुरंत और स्थानीय दर्द राहत प्रदान करती हैं।

नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) और एसिटामिनोफेन:

ये आम दवाएं सूजन और दर्द को कम करने में मदद करती हैं।

ज़रूरत पड़ने पर नर्व-ब्लॉक्स:

विशेष मामलों में, दर्द पैदा करने वाली तंत्रिकाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया जाता है, जिससे दर्द से लंबी अवधि तक राहत मिलती है।

समर्पित फिजियोथेरेपी टीम: हम सुनिश्चित करते हैं कि आप जल्दी सामान्य जिंदगी में लौटें


एस.सी.आई. हॉस्पिटल की समर्पित फिजियोथेरेपी टीम आपकी रिकवरी का एक अभिन्न अंग है। उनका लक्ष्य आपको जल्द से जल्द सामान्य और सक्रिय जीवन में वापस लाना है। फिजियोथेरेपी कई चरणों में होती है:

  • बेड-एक्सरसाइज (बिस्तर पर व्यायाम): सर्जरी के तुरंत बाद, बिस्तर पर रहते हुए कुछ हल्के व्यायाम शुरू किए जाते हैं। इनमें एंकल पंप्स (टखने को ऊपर-नीचे करना), क्वाड सेट्स (जांघ की मांसपेशियों को कसना), और हील स्लाइड्स (एड़ी को बिस्तर पर खिसकाते हुए घुटना मोड़ना) शामिल हैं। ये व्यायाम खून के थक्के बनने से बचाने और घुटने की जकड़न को कम करने में मदद करते हैं।
  • वॉकर से चलना: अधिकांश मरीज़ सर्जरी के अगले ही दिन फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में वॉकर के सहारे कुछ कदम चलना शुरू कर देते हैं। अगले 1-2 हफ्तों में, मरीज़ों की प्रगति के आधार पर वॉकर से स्टिक (छड़ी) पर जाने की सलाह दी जा सकती है (डॉक्टर के परामर्श से)।
  • रेंज ऑफ मोशन (ROM) और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज (मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम): फिजियोथेरेपी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घुटने को पूरी तरह से मोड़ने और सीधा करने की क्षमता को वापस लाना है। इसके साथ ही, जांघ और आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी कराए जाते हैं, जो घुटने को सहारा देते हैं।
  • गेट-ट्रेनिंग (चलने का प्रशिक्षण): फिजियोथेरेपिस्ट आपको सही चाल पैटर्न और स्टेप पैटर्न सिखाते हैं, ताकि आप बिना लंगड़ाए आत्मविश्वास से चल सकें।
  • सीढ़ियां और सेफ्टी (सुरक्षा): जब आप पर्याप्त रूप से ठीक हो जाते हैं, तो आपको रेलिंग पकड़कर सीढ़ियां चढ़ने और उतरने का सही तरीका सिखाया जाता है। घर और बाथरूम में गिरने से बचने के लिए सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए जाते हैं।
  • आउटपेशेंट रिहैब (बाह्य रोगी पुनर्वास): सर्जरी के 6-12 सप्ताह बाद तक, आपको आउटपेशेंट फिजियोथेरेपी के लिए अस्पताल या क्लिनिक जाना पड़ सकता है। इस चरण में प्रोग्रेसिव एक्सरसाइज, संतुलन (बैलेंस) और सहनशक्ति (स्टैमिना) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, ताकि आप अपनी दैनिक गतिविधियों और खेलकूद में पूरी तरह से लौट सकें।

SCI हॉस्पिटल में घुटना प्रत्यारोपण के लिए एक संपूर्ण सेवा प्रणाली मौजूद है:


विस्तृत और सही निदान:

  • एक्स-रे: जॉइंट स्पेस, हड्डी के उभार (स्पर्स), एलाइनमेंट (वेरस/वैल्गस)।
  • MRI/CT (जरूरत पर): कार्टिलेज, लिगामेंट्स और जॉइंट की सूक्ष्म जानकारी।
  • क्लिनिकल आकलन: चाल, मोड़ने-सीधा करने की क्षमता, दर्द का पैटर्न।
  • लक्ष्य: सटीक सर्जरी प्लान बनाना—किस एंगल पर कट, कौन-सा इम्प्लांट, कितना सॉफ्ट-टिशू रिलीज़ आदि।

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम:

  • ऑपरेशन से पहले मेडिकल फिटनेस (शुगर/बीपी/हृदय)।
  • एनेस्थीसिया टीम का प्री-एनेस्थेटिक चेकअप।
  • फिजियो और पोषण सलाह ताकि शरीर सर्जरी के लिए तैयार हो।

ट्रेडिशनल और रोबोटिक घुटना सर्जरी:

  • ट्रेडिशनल: अनुभवी सर्जनों के हाथ में उत्कृष्ट परिणाम।
  • रोबोटिक/कम्प्यूटर असिस्टेड: सटीक एलाइनमेंट और वैयक्तिक बैलेंसिंग के फायदे।
  • कौन-सा विकल्प चुनें: आपकी हड्डियों की स्थिति, बजट, उपलब्धता और सर्जन की सलाह पर निर्भर।

मल्टीडिसिप्लिनरी ऑप्टिमाइजेशन:

  • प्री-ऑप काउंसलिंग, न्यूट्रिशन गाइडेंस, शुगर कंट्रोल।
  • DVT प्रिवेंशन: स्टॉकिंग्स, जल्दी चलना, और डॉक्टर द्वारा बताई दवाएं।
  • होम-सेफ्टी प्लान: बेड/कुर्सी की ऊंचाई, नॉन-स्लिप मैट, रेलिंग।

एडवांस पेन मैनेजमेंट क्लिनिक:

  • सर्जरी के बाद दर्द पर करीबी निगरानी।
  • दवा-शेड्यूल, बर्फ की सिकाई और पोजिशनिंग।
  • जरूरत पर नर्व-ब्लॉक्स/एडजस्टमेंट।

फिजियोथेरेपी और पुनर्वास विभाग:

  • डे-1: बेड-एक्सरसाइज, वॉकर के साथ चलना।
  • सप्ताह 1-2: घर के अंदर वॉक, ROM 0-90° के करीब।
  • सप्ताह 3-6: स्टिक पर प्रगति, ROM और स्ट्रेंथ बढ़ाना।
  • सप्ताह 6-12: बैलेंस/सीढ़ियां, आउटडोर वॉक, रूटीन में वापसी।

निरंतर फॉलो-अप:

  • जख्म, ड्रेसिंग और टांके/स्टेपल की पैटर्न समीक्षा।
  • तापमान/सूजन/लालिमा/खून के थक्के के लक्षणों पर सतर्कता।
  • ROM, चाल और गतिविधि-लक्ष्य का आकलन।
  • लंबी अवधि: वजन नियंत्रण, सुरक्षित गतिविधियां, एक्स-रे फॉलो-अप।

लक्षण, कारण और गैर-सर्जिकल उपचार (जहां संभव)

  • लक्षण: दर्द, सूजन, stiffness, चाल में बदलाव, घुटने मुड़ने-सीधा करने में कठिनाई।
  • कारण: उम्र, वजन, पुरानी चोट, परिवार में इतिहास, रुमेटॉइड/गाउट जैसी बीमारियां।

गैर-सर्जिकल विकल्प (प्रारंभिक/मध्यम अवस्था में):

  • वजन कम करना, सही जूते और घुटने-सपोर्ट।
  • पेन-रिलीवर/एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं (डॉक्टर की सलाह से)।
  • फिजियोथेरेपी: स्ट्रेंथ और ROM एक्सरसाइज।
  • इंजेक्शन (जैसे हायालुरोनिक एसिड/स्टेरॉइड—केस के अनुसार)।
  • हीट/आइस, एक्टिविटी मॉडिफिकेशन।

कब ये नाकाफी हो जाते हैं: लंबे समय तक सुधार न हो, एक्स-रे में advanced घिसाव, रात के दर्द और चलने में गंभीर दिक्कत—तब सर्जरी बेहतर विकल्प।

ऑपरेशन का दिन—क्या होता है?

  • एनेस्थीसिया: स्पाइनल/रीजनल या जनरल, मेडिकल फिटनेस के अनुसार।
  • सर्जरी समय: लगभग 45-90 मिनट (केस के अनुसार)।
  • क्या किया जाता है: घिसी कार्टिलेज/हड्डी की पतली परत हटाकर, सटीक कटिंग जिग/रोबोटिक गाइडेंस से नई सतहें लगती हैं—ीमर पर मेटल, टिबिया पर मेटल प्लेट (टिबियल ट्रे) और बीच में हाई-क्वालिटी प्लास्टिक (पॉलीइथिलीन) का इन्सर्ट, जो “स्लाइडिंग कुशन” का काम करता है। जरूरत हो तो कनि-कैप (पटेला) की सतह भी स्मूथ की जाती है।अंत में: घुटने को मोड़-सीधा करके stability और smooth movement चेक। ड्रेसिंग और वार्ड में ट्रांसफर।

Dr. Daipayan Ghosh

MBBS, DNB - General Surgery, General Surgeon,Laparoscopic Surgeon,Proctologist,Bariatric Surgeon

  • General Surgeon,Laparoscopic Surgeon,Proctologist,Bariatric Surgeon
  • 20+ Years Experience
Dr. Shambhav Chandra

MBBS, MS - General Surgery, General Surgeon, Bariatric Surgeon, Laparoscopic Surgeon

  • General Surgeon, Bariatric Surgeon, Laparoscopic Surgeon
  • 11+ Years Experience

रिकवरी—घर जाने के बाद क्या करें?


पहले 72 घंटे:

  • दर्द-निवारक समय पर लें।
  • वॉकर के साथ 3-4 बार छोटी-छोटी वॉक।
  • एंकल पंप/क्वाड सेट्स—खून जमें नहीं, stiffness कम हो।

बर्फ: 15-20 मिनट, दिन में 3-4 बार सूजन-टेंडरनेस पर।

पहला 2 हफ्ते:

  • घर के अंदर सुरक्षित वॉक।
  • ROM लक्ष्य: चिकित्सकीय सलाह अनुसार (आमतौर पर 0-90° के करीब)।
  • ड्रेसिंग साफ-सुथरी रखें। लालिमा/मवाद/गंध हो तो तुरंत बताएं।

सप्ताह 3-6:

  • फिजियो के साथ स्टिक पर प्रगति।
  • ROM/स्ट्रेंथ बढ़ाएं, सीढ़ियों की ट्रेनिंग।
  • घर/मोहल्ले में वॉक दूरी बढ़ाएं।

सप्ताह 6-12:

  • बैलेंस और स्टैमिना ट्रेनिंग।
  • ड्राइव/ऑफिस—सर्जन/फिजियो की मंजूरी के बाद (आमतौर पर डेस्क जॉब 4-6 हफ्ते, फील्ड जॉब 8-12 हफ्ते)।
  • लो-इम्पैक्ट एक्टिविटी: स्टेशनेरी साइकल, स्विमिंग (घाव पूरी तरह ठीक होने पर), योग के हल्के आसन—फिजियो की सलाह से।

सावधानियां:

  • बहुत नीचे न बैठें, पैर क्रॉस न करें।
  • फिसलन-रहित बाथरूम, ग्रैब-बार, ऊंचा कमोड इस्तेमाल करें।
  • हाई-इम्पैक्ट दौड़/कूद शुरुआती महीनों में टालें।
  • वजन नियंत्रित रखें—ये घुटने का सबसे बड़ा दोस्त है।

दिल्ली में घुटना प्रत्यारोपण का खर्च: पूरी पारदर्शिता, कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं

SCI हॉस्पिटल में खर्च आइटम-वाइज़ बताया जाता है:

  • सर्जन/ओटी/एनेस्थीसिया
  • इम्प्लांट (ब्रांड/टाइप के अनुसार फर्क)
  • हॉस्पिटल स्टे (रूम कैटेगरी के अनुसार)
  • दवाएं, कंज़्यूमेबल्स, जांचें
  • फिजियो और फॉलो-अप

फैक्टर जो कॉस्ट प्रभावित करते हैं:

  • रोबोटिक बनाम ट्रेडिशनल
  • जटिलता/रिविजन केस
  • सह-रोगों की मॉनिटरिंग
  • रूम कैटेगरी

इंश्योरेंस/ईएमआई:

  • अधिकांश स्वास्थ्य बीमा TKR को कवर करते हैं।
  • ईएमआई विकल्प से भुगतान आसान बनता है।
  • हमारी टीम कैशलेस/रीइम्बर्समेंट प्रक्रिया में दस्तावेज़ी मदद करती है।






FAQs

आधुनिक दर्द प्रबंधन तकनीकों (एडवांस पेन मैनेजमेंट) जैसे मल्टीमॉडल एनाल्जेसिया, नर्व-ब्लॉक्स और नियंत्रित दवा-शेड्यूल के कारण सर्जरी के बाद दर्द को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाता है। ज्यादातर मरीज 24 घंटे के भीतर चलना शुरू कर देते हैं। दर्द की दवाएं समय पर लेना और बर्फ की सिकाई करना दर्द को कम करने में बहुत मदद करता है।

सही इम्प्लांट एलाइनमेंट (सही स्थिति), वजन नियंत्रण और सुरक्षित गतिविधियों के साथ, घुटना प्रत्यारोपण इम्प्लांट आमतौर पर 15-20 साल या उससे भी अधिक समय तक चल सकता है। कई मरीज लंबे समय तक दर्द-मुक्त जीवन जीते हैं। रोबोटिक/कम्प्यूटर-असिस्टेड सर्जरी से प्राप्त सटीक अलाइनमेंट इम्प्लांट की दीर्घायु में सहायक हो सकता है।

आमतौर पर, घुटना प्रत्यारोपण के बाद अस्पताल में 2-4 दिन रहना पड़ता है। ERAS (Enhanced Recovery After Surgery) प्रोटोकॉल और मिनिमली इनवेसिव (न्यूनतम चीर-फाड़ वाली) तकनीकों से अस्पताल में रहने की अवधि कम हो सकती है, बशर्ते सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न किया जाए।

यह आपकी नौकरी के प्रकार और व्यक्तिगत रिकवरी पर निर्भर करता है। डेस्क जॉब (बैठने वाला काम) वाले मरीज आमतौर पर 4-6 सप्ताह में काम पर लौट सकते हैं, जबकि फील्ड जॉब (शारीरिक रूप से सक्रिय काम) के लिए 8-12 सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। ड्राइविंग आमतौर पर 4-6 सप्ताह के बाद शुरू की जा सकती है, लेकिन हमेशा अपने सर्जन और फिजियोथेरेपिस्ट की मंजूरी अवश्य लें।

हाँ, कुछ मामलों में, विशेष रूप से शारीरिक रूप से फिट मरीजों में, दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण एक साथ (सिमल्टेनियस बाइलेट्रल TKR) संभव है। हालांकि, कई मामलों में कुछ अंतराल पर (स्टेज्ड) सर्जरी करना भी बेहतर माना जाता है। यह निर्णय रोगी की मेडिकल फिटनेस, उम्र, घर पर उपलब्ध सहायता प्रणाली और सर्जन की व्यक्तिगत सलाह पर आधारित होता है।

हाँ, डायबिटीज (मधुमेह) या उच्च रक्तचाप (बीपी) होने पर भी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी सुरक्षित है, बशर्ते सर्जरी से पहले शुगर और बीपी को नियंत्रण में रखा जाए। प्री-ऑप फिटनेस मूल्यांकन और सर्जरी के दौरान विशेषज्ञ निगरानी से जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है।

हाँ, अधिक वजन वाले मरीजों में भी सर्जरी हो सकती है, लेकिन मोटापा कुछ जटिलताओं (जैसे संक्रमण, घाव भरने में देरी) के जोखिम को बढ़ा सकता है। सर्जरी से पहले वजन, शुगर, बीपी और थायरॉइड जैसे सह-रोगों को नियंत्रित करना और सर्जरी के बाद वजन संतुलन बनाए रखना इम्प्लांट के जीवनकाल को बढ़ाने में मदद करता है।

कई मरीज समय के साथ कम ऊंचाई वाली सीट पर बैठने, पालथी मारने या नमाज़ पढ़ने जैसी गतिविधियों तक पहुंचने में सक्षम होते हैं। यह व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करता है: इम्प्लांट का प्रकार, सर्जरी का अलाइनमेंट, मांसपेशियों की ताकत और फिजियोथेरेपी का कितनी गंभीरता से पालन किया गया है, यह सब महत्वपूर्ण है। इन गतिविधियों को सर्जन की मंजूरी के बाद ही धीरे-धीरे और सावधानी से करने का प्रयास करें।

हाँ, कम प्रभाव वाली गतिविधियां (लो-इम्पैक्ट एक्टिविटीज) जैसे पैदल चलना, स्थिर साइक्लिंग और योग के हल्के आसन चिकित्सकीय मंजूरी के साथ धीरे-धीरे शुरू किए जा सकते हैं। ये घुटने पर कम दबाव डालती हैं और फिटनेस बनाए रखने में सहायक होती हैं। हालांकि, हाई-इम्पैक्ट गतिविधियां जैसे दौड़ना या कूदना शुरुआती महीनों में टालें।

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Written By: डॉ. राजेश बावरी
Education: MBBS, Diploma in Anesthesiology, MS - Orthopaedics
Experience: 34 Years

तीन दशकों से अधिक लंबे करियर के साथ, डॉ. राजेश बावरी ने स्वयं को एक विश्वसनीय और कुशल आर्थोपेडिक सर्जन के रूप में स्थापित किया है। वे जटिल ट्रॉमा सर्जरी और रिकंस्ट्रक्टिव प्रक्रियाओं, विशेषकर जॉइंट रिप्लेसमेंट में अपनी विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध हैं। उत्कृष्ट मरीज देखभाल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उनके बेहतरीन रिकॉर्ड से स्पष्ट होती है।