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भगंदर क्यों होता है, यह समझना इसके सही इलाज और बचाव के लिए बहुत ज़रूरी है। ज़्यादातर मामलों में इसकी शुरुआत गुदा के अंदर मौजूद छोटी ग्रंथियों (anal glands) के इन्फेक्शन से होती है। आइए इसके मुख्य कारणों और जोखिम कारकों को विस्तार से जानते हैं:
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<h3>भगंदर के मुख्य कारण</h3>
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<h4>गुदा का फोड़ा (Anal Abscess):</h4>
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यह भगंदर का सबसे आम कारण है। हमारी गुदा के अंदर कुछ छोटी ग्रंथियां होती हैं जो म्यूकस बनाती हैं, जिससे मल त्याग में आसानी होती है। कभी-कभी ये ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, और बैक्टीरिया के कारण इनमें इन्फेक्शन होकर मवाद भर जाता है। इसे 'गुदा का फोड़ा' कहते हैं।
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जब यह फोड़ा बढ़कर त्वचा की तरफ अपना रास्ता बना लेता है और बाहर फूट जाता है, तो यह एक सुरंग या 'फिस्टुला' का रूप ले लेता है। लगभग 50% लोगों को, जिन्हें गुदा का फोड़ा होता है, उन्हें बाद में भगंदर हो जाता है।
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<h3>भगंदर के अन्य जोखिम कारक:</h3>
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<ul> <li><strong>क्रोहन रोग (Crohn's Disease):</strong> यह आंतों की एक पुरानी सूजन की बीमारी है। क्रोहन रोग के मरीज़ों में भगंदर होने का खतरा बहुत ज़्यादा होता है क्योंकि उनकी आंतों में लगातार सूजन बनी रहती है।</li> <li><strong>डायवर्टीकुलाइटिस (Diverticulitis):</strong> यह बड़ी आंत की दीवारों में छोटी थैलियों (diverticula) में सूजन और इन्फेक्शन के कारण होता है। यह भी भगंदर का कारण बन सकता है।</li> <li><strong>टीबी (Tuberculosis):</strong> हालांकि यह फेफड़ों की बीमारी मानी जाती है, लेकिन टीबी का इन्फेक्शन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जिसमें गुदा का क्षेत्र भी शामिल है।</li> <li><strong>कैंसर:</strong> बहुत ही दुर्लभ मामलों में, गुदा का कैंसर (anal cancer) या रेक्टल कैंसर (rectal cancer) भी भगंदर का कारण हो सकता है।</li> <li><strong>सर्जरी या चोट:</strong> गुदा क्षेत्र में पहले हुई कोई सर्जरी, चोट या प्रसव के दौरान लगी चोट भी फिस्टुला बनने का कारण हो सकती है।</li> <li><strong>यौन संचारित रोग (STDs):</strong> कुछ यौन संचारित रोग जैसे क्लैमाइडिया (Chlamydia) या सिफलिस (Syphilis) भी गुदा में इन्फेक्शन और फोड़े पैदा कर सकते हैं, जो बाद में भगंदर बन जाते हैं।</li> <li><strong>कमजोर इम्युनिटी:</strong> एचआईवी (HIV) या अन्य बीमारियों के कारण जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) कमज़ोर होती है, उनमें इन्फेक्शन का खतरा ज़्यादा होता है, जिससे भगंदर हो सकता है।</li> </ul>
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<h3>जटिल फिस्टुला (Complex Fistula):</h3>
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<ul> <li>इसमें एक से ज़्यादा रास्ते या शाखाएं (multiple tracks) हो सकती हैं, जो घोड़े की नाल (horseshoe) जैसा आकार बना सकती हैं।</li> <li>यह गुदा की मांसपेशियों (sphincter muscles) के एक बड़े हिस्से को पार करता है।</li> <li>यह किसी अन्य बीमारी जैसे क्रोहन रोग (Crohn's Disease) के कारण हो सकता है।</li> <li>इसमें बार-बार फोड़े बनते रहते हैं।</li> <li>जटिल फिस्टुला का इलाज ज़्यादा चुनौतीपूर्ण होता है और इसके लिए विशेषज्ञ सर्जन और उन्नत तकनीकों की ज़रूरत होती है, जो <strong>SCI हॉस्पिटल</strong> में उपलब्ध हैं।</li> </ul>
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<h3>लो या हाई फिस्टुला (Low or High Fistula)</h3>
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यह वर्गीकरण इस बात पर आधारित है कि फिस्टुला का रास्ता गुदा की स्फिंक्टर मांसपेशियों के कितना ऊपर या नीचे से गुज़रता है।
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<h4>लो फिस्टुला (Low Fistula):</h4>
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<ul> <li>यह फिस्टुला स्फिंक्टर मांसपेशियों के निचले हिस्से से गुज़रता है या उन्हें बिल्कुल भी पार नहीं करता।</li> <li>ज़्यादातर भगंदर इसी प्रकार के होते हैं।</li> <li>इनका इलाज करना आसान और सुरक्षित माना जाता है क्योंकि मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने का खतरा कम होता है।</li> </ul>
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<h4>हाई फिस्टुला (High Fistula):</h4>
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<ul> <li>यह फिस्टुला स्फिंक्टर मांसपेशियों के एक बड़े और ऊपरी हिस्से को पार करता है।</li> <li>यह कम आम लेकिन ज़्यादा गंभीर होता है।</li> <li>इसका इलाज बहुत सावधानी से करना पड़ता है, क्योंकि गलत तरीके से सर्जरी करने पर मल रोकने की क्षमता (continence) पर असर पड़ सकता है।</li> </ul>
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फिस्टुला का सही प्रकार जानने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच के अलावा एमआरआई (MRI) जैसे टेस्ट की सलाह देते हैं, ताकि इलाज की सबसे अच्छी योजना बनाई जा सके।
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<h3>आधुनिक जांच तकनीकें (Modern Diagnostic Techniques)</h3>
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कई बार, खासकर जटिल या हाई फिस्टुला के मामलों में, सिर्फ़ शारीरिक जांच काफी नहीं होती। फिस्टुला के पूरे रास्ते का नक्शा (map) बनाने के लिए कुछ और टेस्ट की ज़रूरत पड़ती है। ये टेस्ट सर्जरी की योजना बनाने के लिए बेहद ज़रूरी हैं।
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<ul> <li><strong>एमआरआई (MRI - Magnetic Resonance Imaging):</strong> इसे भगंदर के निदान के लिए 'गोल्ड स्टैंडर्ड' यानी सबसे अच्छा टेस्ट माना जाता है। एमआरआई स्कैन से फिस्टुला के रास्ते, उसकी शाखाओं और स्फिंक्टर मांसपेशियों के साथ उसके संबंध की एक बहुत ही साफ़ और विस्तृत 3D तस्वीर मिल जाती है। इससे सर्जन को ऑपरेशन से पहले ही पता चल जाता है कि उन्हें सर्जरी कैसे करनी है। <strong>SCI हॉस्पिटल</strong> में मरीज़ों को उच्च-गुणवत्ता वाले एमआरआई स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।</li> <li><strong>एंडोएनल अल्ट्रासाउंड (Endoanal Ultrasound):</strong> इस टेस्ट में एक छोटा अल्ट्रासाउंड प्रोब गुदा के अंदर डाला जाता है। यह ध्वनि तरंगों का उपयोग करके फिस्टुला के रास्ते और आसपास की मांसपेशियों की तस्वीर बनाता है। यह भी एमआरआई की तरह ही एक बहुत उपयोगी जांच है।</li> <li><strong>फिस्टुलोग्राम (Fistulogram):</strong> यह एक प्रकार का एक्स-रे है। इसमें फिस्टुला के बाहरी छेद से एक विशेष डाई (contrast agent) इंजेक्ट की जाती है और फिर एक्स-रे लिया जाता है। इससे डाई फिस्टुला के रास्ते में फैल जाती है और एक्स-रे में उसका पूरा रास्ता दिखाई देता है। हालांकि, एमआरआई के आने के बाद इसका इस्तेमाल अब कम हो गया है।</li> </ul>
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<h3>सर्जरी के बाद की देखभाल (Post-Surgical Care)</h3>
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सर्जरी की सफलता जितनी सर्जन के कौशल पर निर्भर करती है, उतनी ही मरीज़ द्वारा की जाने वाली देखभाल पर भी।
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<ul> <li><strong>सिट्ज़ बाथ (Sitz Bath):</strong> दिन में 2-3 बार हल्के गर्म पानी के टब में 10-15 मिनट के लिए बैठें। इससे दर्द और सूजन कम होती है और घाव साफ रहता है।</li> <li><strong>आहार:</strong> खूब सारा पानी पिएं और फाइबर युक्त भोजन (फल, सब्जियां, दलिया, इसबगोल) खाएं ताकि कब्ज न हो और मल मुलायम रहे।</li> <li><strong>दवाएं:</strong> डॉक्टर द्वारा दी गई दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाएं समय पर लें।</li> <li><strong>स्वच्छता:</strong> घाव वाले क्षेत्र को साफ और सूखा रखें।</li> <li><strong>फॉलो-अप:</strong> डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर फॉलो-अप के लिए <strong>SCI हॉस्पिटल</strong> ज़रूर आएं ताकि आपकी रिकवरी पर नज़र रखी जा सके।</li> </ul>
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<h3>नॉन-सर्जिकल उपचार (Non-Surgical Treatment)</h3>
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यह समझना बहुत ज़रूरी है कि नॉन-सर्जिकल तरीके भगंदर को जड़ से खत्म नहीं कर सकते। ये केवल लक्षणों में राहत दे सकते हैं या सर्जरी के साथ सहायक उपचार के रूप में काम आ सकते हैं। किसी भी घरेलू उपाय को आज़माने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
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<h3>भगंदर में खान-पान और जीवनशैली (Diet and Lifestyle in Fistula)</h3>
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सही खान-पान और जीवनशैली अपनाना इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए।
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<h4>क्या खाएं:</h4>
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<ul> <li><strong>उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ:</strong> अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में फाइबर शामिल करें। इसके लिए साबुत अनाज (गेहूं, जई, दलिया), दालें, बीन्स, इसबगोल की भूसी और चिया सीड्स का सेवन करें।</li> <li><strong>फल और सब्जियां:</strong> पपीता, सेब, केला, नाशपाती जैसे फल और पालक, गाजर, खीरा जैसी सब्जियां खाएं।</li> <li><strong>तरल पदार्थ:</strong> दिन में 8-10 गिलास पानी ज़रूर पिएं। इसके अलावा नारियल पानी, छाछ और सूप भी फायदेमंद हैं।</li> <li><strong>प्रोबायोटिक्स:</strong> दही और छाछ जैसे प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं।</li> </ul>
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<h4>क्या न खाएं:</h4>
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<ul> <li><strong>मसालेदार और तला हुआ भोजन:</strong> ज़्यादा मिर्च-मसाले वाला और तला हुआ खाना जलन पैदा कर सकता है।</li> <li><strong>मैदा और प्रोसेस्ड फूड:</strong> मैदा, सफेद ब्रेड, बिस्कुट, नूडल्स और जंक फूड से बचें क्योंकि ये कब्ज पैदा करते हैं।</li> <li><strong>रेड मीट:</strong> रेड मीट को पचाना मुश्किल होता है, इसलिए इससे परहेज करें।</li> <li><strong>कैफीन और शराब:</strong> चाय, कॉफी और शराब का सेवन कम करें क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं।</li> </ul>
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<h3>भगंदर से जुड़े मिथक और तथ्य (Myths and Facts about Fistula)</h3>
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भगंदर को लेकर समाज में कई गलत धारणाएं और मिथक फैले हुए हैं, जो मरीज़ों को डराते हैं और उन्हें सही इलाज लेने से रोकते हैं। आइए इन मिथकों का सच जानते हैं।
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<strong>मिथक 1: भगंदर सिर्फ एक फुंसी है, यह अपने आप ठीक हो जाएगा।</strong>
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<strong>तथ्य:</strong> यह बिल्कुल गलत है। भगंदर एक फुंसी नहीं, बल्कि त्वचा और गुदा नहर के बीच एक anormal सुरंग है। यह अपने आप कभी ठीक नहीं होता। इसे अनदेखा करने पर इन्फेक्शन बढ़ सकता है और यह और भी जटिल (complex) हो सकता है।
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<strong>मिथक 2: भगंदर का इलाज सिर्फ दर्दनाक और बड़ी सर्जरी से ही होता है।</strong>
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<strong>तथ्य:</strong> यह पुरानी बात है। आज के समय में लेजर सर्जरी (FiLaC) और VAAFT जैसी कई मिनिमली इनवेसिव तकनीकें मौजूद हैं।
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<strong>मिथक 3: भगंदर की सर्जरी के बाद मल त्याग पर कंट्रोल खत्म हो जाता है।</strong>
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<strong>तथ्य:</strong> यह भगंदर से जुड़ा सबसे बड़ा डर है। अगर सर्जरी किसी अनुभवहीन डॉक्टर से कराई जाए तो ऐसा जोखिम हो सकता है।
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<strong>मिथक 4:</strong> घरेलू नुस्खे या दवाएं भगंदर को जड़ से खत्म कर सकती हैं।
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<strong>तथ्य:</strong> कोई भी दवा, क्रीम या घरेलू उपाय फिस्टुला की सुरंग को बंद नहीं कर सकता। ये उपाय केवल अस्थायी रूप से दर्द, सूजन और इन्फेक्शन को कम कर सकते हैं। भगंदर का एकमात्र स्थायी इलाज सर्जरी ही है।
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<strong>मिथक 5:</strong> भगंदर एक बार ठीक होने के बाद बार-बार होता है।
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<strong>तथ्य:</strong> अगर फिस्टुला का सही तरीके से निदान करके और सही सर्जिकल तकनीक से उसका पूरा इलाज किया जाए, तो इसके दोबारा होने की संभावना बहुत कम (5-10%) होती है। इलाज अधूरा रहने या गलत तकनीक का इस्तेमाल होने पर ही यह दोबारा हो सकता है।
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<strong>मिथक 6: भगंदर बवासीर का ही एक रूप है।</strong>
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<strong>तथ्य:</strong> नहीं, भगंदर (Fistula) और बवासीर (Piles/Hemorrhoids) दो बिल्कुल अलग बीमारियां हैं। बवासीर में गुदा की नसें सूज जाती हैं, जबकि भगंदर में एक संक्रमित सुरंग बन जाती है। दोनों के लक्षण और इलाज पूरी तरह से अलग हैं।
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<h3>भगंदर से बचाव के तरीके (Ways to Prevent Fistula)</h3>
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हालांकि सभी तरह के भगंदर को रोकना संभव नहीं है, खासकर जो क्रोहन रोग जैसी बीमारियों के कारण होते हैं, फिर भी एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप इसका खतरा काफी हद तक कम कर सकते हैं।
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<ul> <li><strong>कब्ज से बचें:</strong> कब्ज भगंदर सहित कई गुदा रोगों की जड़ है। इससे बचने के लिए अपनी डाइट में फाइबर युक्त आहार जैसे फल, सब्जियां, सलाद और साबुत अनाज शामिल करें।</li> <li><strong>पर्याप्त पानी पिएं:</strong> दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। यह आपके मल को नरम रखने में मदद करता है, जिससे मल त्याग के समय ज़ोर नहीं लगाना पड़ता।</li> <li><strong>गुदा की स्वच्छता बनाए रखें:</strong> हर बार मल त्याग के बाद गुदा क्षेत्र को पानी से अच्छी तरह साफ करें और उसे मुलायम तौलिये से सुखाएं। कठोर टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करने से बचें।</li> <li><strong>गुदा के फोड़े का तुरंत इलाज कराएं:</strong> अगर आपको गुदा के पास कोई फोड़ा या गांठ महसूस होती है, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें। तुरंत <strong>SCI हॉस्पिटल</strong> में डॉक्टर को दिखाएं। फोड़े का सही समय पर इलाज कराने से उसे भगंदर बनने से रोका जा सकता है।</li> <li><strong>ज़्यादा देर तक टॉयलेट में न बैठें:</strong> टॉयलेट में मोबाइल या अखबार लेकर ज़्यादा देर तक बैठने की आदत छोड़ दें। इससे गुदा क्षेत्र पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।</li> <li><strong>नियमित व्यायाम करें:</strong> रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या हल्का व्यायाम करना पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज को रोकने में मदद करता है।</li> <li><strong>स्वस्थ वजन बनाए रखें:</strong> अधिक वजन होने से भी गुदा क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए स्वस्थ आहार और व्यायाम के माध्यम से अपना वजन नियंत्रित रखें।</li> </ul>
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FAQs
Question:
Answer:
पारंपरिक सर्जरी (फिस्टुलोटॉमी) के बाद कुछ दिनों तक दर्द रह सकता है, जिसे दवाओं से नियंत्रित किया जाता है। लेकिन SCI हॉस्पिटल में उपलब्ध आधुनिक लेजर सर्जरी और VAAFT जैसी प्रक्रियाओं में दर्द न के बराबर होता है और मरीज़ बहुत सहज महसूस करता है।
Question:
Answer:
यह सर्जरी के प्रकार पर निर्भर करता है। लेजर सर्जरी या VAAFT के बाद मरीज़ 2-3 दिनों में ही चलने-फिरने और अपने हल्के-फुल्के काम करने लगता है और 1 हफ्ते के अंदर ऑफिस भी जा सकता है। पारंपरिक सर्जरी में पूरी तरह ठीक होने में 4 से 6 हफ्ते लग सकते हैं।
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Question:
Answer:
नहीं, भगंदर का स्थायी इलाज बिना सर्जरी के संभव नहीं है। दवाएं या घरेलू उपाय केवल अस्थायी राहत दे सकते हैं, लेकिन वे उस संक्रमित सुरंग को बंद नहीं कर सकते जो बन चुकी है।
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Question:
Answer:
इलाज का खर्च फिस्टुला के प्रकार, उसकी जटिलता और चुनी गई सर्जरी की तकनीक पर निर्भर करता है। SCI हॉस्पिटल में हम मरीज़ों को पारदर्शी बिलिंग और किफायती पैकेज प्रदान करते हैं। आप हमारे हॉस्पिटल में आकर या फोन पर संपर्क करके विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हमारी टीम आपको इंश्योरेंस और ईएमआई (EMI) विकल्पों के बारे में भी मार्गदर्शन करेगी।
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Question:
Answer:
यह बहुत ही दुर्लभ है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक रहने वाला और इलाज न किया गया भगंदर गुदा कैंसर का रूप ले सकता है। इसलिए, भगंदर का सही समय पर इलाज कराना बहुत ज़रूरी है।
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मैं कई महीनों से भगंदर की समस्या से जूझ रहा था। बार-बार गुदा के पास फोड़ा बनता, फूट जाता और फिर वापस आ जाता था। लगातार मवाद और बदबू की वजह से ऑफिस जाना और लोगों से मिलना बहुत शर्मनाक हो गया था। SCI हॉस्पिटल में डॉ. सुमीत शाह ने मेरा पूरा एमआरआई करवाकर फिस्टुला की सही स्थिति समझाई और लेजर सर्जरी (FiLaC) की सलाह दी। सर्जरी के बाद दर्द बहुत कम रहा, कोई बड़ा कट नहीं लगा और कुछ ही दिनों में स्राव भी बंद हो गया। अब मैं बिना किसी डर और असुविधा के अपनी सामान्य जिंदगी जी रहा हूं।
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मुझे गुदा के पास बार-बार बनते फोड़े की वजह से चलना-फिरना, बैठना और सोना तक मुश्किल हो गया था। कई बार स्थानीय डॉक्टर से दवाएं और ड्रेसिंग करवाईं, लेकिन आराम सिर्फ कुछ दिनों का ही रहता था। SCI हॉस्पिटल पहुंचने पर डॉक्टरों ने विस्तार से समझाया कि यह केवल फोड़ा नहीं, बल्कि भगंदर है, जिसका स्थायी इलाज सर्जरी ही है। VAAFT प्रोसीजर के बाद न तो बड़ा घाव हुआ, न ही मल त्याग पर कोई दिक्कत आई। आज महीनों हो गए हैं और दोबारा कोई फोड़ा या मवाद नहीं बना।
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